चंडीगढ़। भाजपा ने पंजाब की राजनीति में बड़ा दांव चलते हुए प्रकाश सिंह बादल के परिवार से जुड़े मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों को अपने साथ लाने की तैयारी कर ली है। मेजर भूप के नाम से पहचाने जाने वाले ढिल्लों जल्द बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। वह अकाली दल भाजपा के दौरान प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक सचिव रह चुके हैं।
बादल परिवार से क्या है रिश्ता
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों दिवंगत पूर्व सांसद गुररजा सिंह बादल के बेटे हैं। गुरराज सिंह, प्रकाश सिंह बादल के पिता रघुराज सिंह के छोटे भाई थे। इस लिहाज से ढिल्लों का बादल परिवार से करीबी पारिवारिक रिश्ता है। इतना ही नहीं उनका पैतृक घर भी बादल गांव में है और यह सुखबीर सिंह बादल के पुराने घर के ठीक बगल में स्थित बताया जाता है। ढिल्लों को बादल परिवार का करीबी माना जाता है। 2012 में उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देते हुए प्रकाश सिंह बादल का राजनीतिक सचिव बनाया गया था।
नायब सैनी और मनप्रीत बादल से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा
कुछ महीने पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी चंडीगढ़ स्थित ढिल्लों पके घर उनका हाल जानने पहुंचे थे। उस समय ढिल्लों रीढ़ की हड्डी की सर्जरी केबाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। ढिल्लों ने तब बताया था कि मनप्रीत सिंह बादल उनसे तीन बार मिलने आए, जबकि सुखबीर सिंह बादल के परिवार से कई उनसे मिलने नहीं आया। हालांकि बाद में सुखबीर बादल ने उनके घर जाकर मुलाकात की थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ढिल्लों अपने बेटे अमरवीर सिंह बावा के साथ बीजेपी में शामिल होंगे। इस दौरान नायब सिंह सैनी और मनप्रीत सिंह बादल की मौजूदगी भी रह सकती है।
लांबी सीट पर चुनाव लड़ने की अटकलें
ढिल्लों के बीजेपी में शामिल होने की खबर के साथ ही उनके अगले विधानसभा चुनाव में उतरने की चर्चा भी तेज हो गई है। पार्टी उन्हें ललांबी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती है। साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां से राकेश ढिंगरा को मैदान पर उतारा था। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी के गुमीत सिंह खुड्डियां को 66,313 वोट मिले थे। प्रकाश सिंह बादल को 54,917 कांग्रेस के जगलाप सिंह अबुलखुराना को 10 हजार 136 और बीजेपी के राकेश ढिंगरा को एक हजार 116 वोट मिले थे।
हालांकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मेज भूपिंदर सिंह ढिल्लों का बीजेपी के साथ जाना पंजाब की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। खासकर बादल परिवार के गढ़ में उनकी राजनीतिक पहचान बीजेपी के लिए स्थानीय स्तर पर फायदेमंद हो सकती है।