मधु सुदन/न्यूज़11 भारत
सरायकेला/डेस्क: कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष फूलकांत झा ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित एक स्मारपत्र भेजकर चक्रधरपुर, घाटशिला और चांडिल अनुमंडलों को जिला घोषित करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए नए जिलों का गठन आवश्यक है.
स्मारपत्र में फूलकांत झा ने उल्लेख किया है कि चक्रधरपुर (सीकेपी) पोड़ाहाट अनुमंडल को बने लगभग 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अब तक इसे जिला का दर्जा नहीं मिल सका है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा, जगन्नाथपुर, नोवामुंडी, मनोहरपुर, गोइलकेरा, मझगांव समेत कई दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए 80 से 100 किलोमीटर या उससे अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है. इससे आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं का समय पर लाभ नहीं मिल पाता.
उन्होंने कहा कि पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला अनुमंडल के बहरागोड़ा, चाकुलिया और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी जिला मुख्यालय जमशेदपुर तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. वहीं, लगभग 24 वर्ष पुराने चांडिल अनुमंडल के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए सरायकेला जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
फूलकांत झा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए चक्रधरपुर, घाटशिला और चांडिल को नए जिले के रूप में घोषित किया जाए. उनका कहना है कि इससे प्रशासन आम लोगों के और करीब पहुंचेगा, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा तथा कोल्हान क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी.
उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि कोल्हान झारखंड सरकार की राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हृदयस्थली रहा है. वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में कोल्हान की 14 विधानसभा सीटों में से 12 सीटों पर महागठबंधन को जनता का समर्थन मिला था. वहीं, क्षेत्र की दो लोकसभा सीटों में से पश्चिमी सिंहभूम सीट पर भी महागठबंधन के प्रत्याशी की जीत हुई थी, जो इस क्षेत्र के लोगों के विश्वास और समर्थन का प्रतीक है.
फूलकांत झा ने कहा कि कोल्हान की जनता लंबे समय से चक्रधरपुर, घाटशिला और चांडिल को जिला बनाने की मांग कर रही है. ऐसे में राज्य सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं सुलभ हों और क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सके.