धनबाद कोर्ट

धनबाद कोर्ट परिसर में पार्किंग विवाद का हाईकोर्ट ने कराया समाधान, जेल शिफ्ट होने के बाद स्थायी समाधान की उम्मीद

धनबाद कोर्ट परिसर में पार्किंग और आवागमन की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका का झारखंड हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया.

By Dipali Kumari
धनबाद कोर्ट परिसर में पार्किंग विवाद का हाईकोर्ट ने कराया समाधान, जेल शिफ्ट होने के बाद स्थायी समाधान की उम्मीद

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क: 
धनबाद कोर्ट परिसर में पार्किंग और आवागमन की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका का झारखंड हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में तत्काल उत्पन्न हुई समस्याओं का काफी हद तक समाधान आपसी बातचीत और सभी पक्षों के सहयोग से हो गया है. वहीं, कोर्ट परिसर के सामने स्थित जेल को भविष्य में शहर के बाहरी इलाके में स्थानांतरित करने पर सहमति बनी है. जेल की जमीन उपलब्ध होने के बाद कोर्ट परिसर से जुड़ी जगह की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा.

यह मामला धनबाद बार एसोसिएशन की ओर से उसके अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी द्वारा दायर जनहित याचिका से संबंधित था. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने की. आदेश 5 अगस्त 2026 को रिजर्व किया गया था और 6 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया गया.

क्या थी बार एसोसिएशन की शिकायत?

धनबाद बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कोर्ट परिसर से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे. एसोसिएशन की मुख्य मांगों में बार एसोसिएशन भवन के आवागमन वाले रास्तों और आपातकालीन निकास को बहाल करना, जस्टिस एसबी सिन्हा द्वार पर किए गए कथित अवैध अतिक्रमण को हटाना, पश्चिमी गेटों को दोबारा खोलना और अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था करना शामिल था.

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि किसी भी पक्ष ने इसे टकराव वाले तरीके से नहीं लिया. बार एसोसिएशन और उसके सदस्यों ने कोर्ट को भरोसा दिया कि वे हड़ताल जैसे किसी गैर-कानूनी या न्यायेतर तरीके का सहारा नहीं लेंगे. वहीं, जिला प्रशासन ने भी समस्या के समाधान के लिए हर संभव और उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया.

हाईकोर्ट ने पहले ही दिया था बातचीत से समाधान का निर्देश

कोर्ट ने 12 मार्च 2026 के आदेश में पार्किंग विवाद को गैर-विवादात्मक बताते हुए इसे बातचीत के जरिए सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया था. इसके लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, धनबाद को जिला प्रशासन और बार एसोसिएशन के बीच संयुक्त बैठक बुलाने को कहा गया था.

इसके बाद 28 मार्च और 11 अप्रैल 2026 को स्टेकहोल्डर बैठकें हुईं. इन बैठकों में 21 अप्रैल तक अल्पकालिक पार्किंग व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी. 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में जब तय समय सीमा तक व्यवस्था पूरी नहीं होने की बात सामने आई, तो हाईकोर्ट ने इसे लागू करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया और साथ ही दीर्घकालिक समाधान के लिए संभावित समय-सीमा मांगी.

वेंडरों को हटाया गया, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती

14 मई 2026 के आदेश में हाईकोर्ट ने दर्ज किया कि अल्पकालिक समाधान की दिशा में काफी हद तक काम हुआ है. कोर्ट के समक्ष बताया गया कि वहां मौजूद वेंडरों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई. हालांकि, स्थायी समाधान के लिए आसपास स्थित जेल को स्थानांतरित करना जरूरी बताया गया था.
इसके बाद 25 जून को कोर्ट ने दोबारा स्टेकहोल्डर बैठक बुलाकर दीर्घकालिक व्यवस्था को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया.

9 जुलाई की बैठक में बनी सहमति

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में 9 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण बैठक हुई. इसमें धनबाद के प्रधान जिला न्यायाधीश, उपायुक्त, सिटी एसपी, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल हुए. प्रधान जिला न्यायाधीश की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट के अनुसार बैठक में सभी पक्षों के बीच सहमति बनी और उसके आधार पर अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी गई.

अधिवक्ताओं और वादियों के लिए बनाई गई पार्किंग

नई व्यवस्था के तहत अधिवक्ताओं और मुकदमों में आने वाले लोगों के वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग स्थान उपलब्ध कराया गया. रोजाना लगने वाले वेंडरों को निर्धारित वेंडिंग जोन में स्थानांतरित कर दिया गया. साथ ही पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि खाली कराए गए पार्किंग क्षेत्र पर दोबारा कब्जा न हो.

हाईकोर्ट ने माना कि पार्किंग को लेकर तत्काल जो समस्या थी, उसका काफी हद तक समाधान हो चुका है.

जेल हटेगी तो निकलेगा स्थायी समाधान का रास्ता

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू दीर्घकालिक समाधान को लेकर सामने आया. स्टेकहोल्डर्स के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि कोर्ट परिसर के सामने वर्तमान में स्थित जेल को भविष्य में शहर के बाहरी इलाके में स्थानांतरित किया जाएगा. जेल के स्थानांतरण के बाद वर्तमान में उपलब्ध होने वाली जमीन का इस्तेमाल कोर्ट परिसर और बार से जुड़ी जगह की समस्या के स्थायी समाधान के लिए किया जा सकेगा.

हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जेल स्थानांतरण की योजना राज्य सरकार की मंजूरी पर निर्भर है. इसलिए इसे लागू करने में समय लगना स्वाभाविक है. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में केवल बार सदस्यों या वादियों के हित को नहीं, बल्कि सभी संबंधित पक्षों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है.

सीमित संसाधनों के न्यायसंगत इस्तेमाल पर जोर

हाईकोर्ट ने कहा कि पार्किंग जैसी जगहें सीमित संसाधन हैं और इनकी मांग को जिला प्रशासन को समानता और न्यायसंगत तरीके से पूरा करना होगा. कोर्ट ने इस बात पर संतोष जताया कि मामले से जुड़े सभी पक्षों ने इसी दृष्टिकोण के साथ समाधान की दिशा में काम किया, जिससे व्यावहारिक समाधान संभव हो सका.

खंडपीठ ने उम्मीद जताई कि दीर्घकालिक समाधान को लेकर दिए गए आश्वासन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे और इस दिशा में गंभीरता से आगे की कार्रवाई की जाएगी.

बार एसोसिएशन के संयम की कोर्ट ने की सराहना

हाईकोर्ट ने पूरे मामले के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस, जिला न्यायपालिका और विशेष रूप से धनबाद बार एसोसिएशन के सहयोग और संयम की सराहना की. कोर्ट ने कहा कि कार्यवाही के दौरान बार सदस्यों का संयम पेशे के लिए सकारात्मक उदाहरण है.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह के रचनात्मक और गैर-विरोधात्मक रवैये की भी विशेष रूप से सराहना की. साथ ही राज्य प्रशासन और उसके अधिवक्ता के मामले को सुलझाने वाले दृष्टिकोण की भी प्रशंसा की गई.

हाईकोर्ट ने PIL का किया निपटारा

चूंकि तत्काल समस्याओं का समाधान बातचीत और आपसी सहमति से काफी हद तक हो चुका है, इसलिए हाईकोर्ट ने कहा कि अब मामले में फैसला करने के लिए कुछ और शेष नहीं है. इसके साथ ही खंडपीठ ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया. लंबित इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (I.A.) भी समाप्त कर दी गईं.

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