मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: लगातार हो रही बारिश ने सीसीएल पिपरवार क्षेत्र में कराए जा रहे विकास और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बचरा कोलयरी स्थित बचरा झूला पुल के समीप सपही नदी पर बनी पुलिया का एप्रोच हिस्सा धंस जाने से आवागमन संकट में पड़ गया है. पुलिया के नीचे तेज जलप्रवाह के कारण मिट्टी का भारी कटाव हो गया है, जिससे सड़क का बड़ा हिस्सा हवा में लटक गया है. हालात ऐसे हैं कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है.
बारिश के बाद सामने आई इस स्थिति ने सीसीएल के उन दावों की भी पोल खोल दी है, जिनमें हर वर्ष सड़क और पुलों की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च करने की बात कही जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली ही तेज बारिश में सड़क और पुलिया का धंस जाना यह साबित करता है कि मरम्मत कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं या फिर गुणवत्ता के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीसीएल प्रबंधन ने क्षतिग्रस्त हिस्से के सामने ओबी डालकर रास्ता बंद कर दिया है, ताकि वाहनों की आवाजाही रोकी जा सके. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल अस्थायी और खानापूर्ति वाला कदम है. उनका आरोप है कि हर वर्ष बरसात के बाद ऐसी ही स्थिति उत्पन्न होती है, कुछ दिनों तक मरम्मत का दिखावा किया जाता है और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है. स्थायी समाधान की दिशा में कभी गंभीर पहल नहीं की जाती.
इधर, भारी वाहनों के लिए बनाए गए वैकल्पिक पुल की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है. पुल पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और कंक्रीट उखड़ने से लोहे की सरिया बाहर निकल आई हैं. इससे प्रतिदिन गुजरने वाले कोयला परिवहन वाहनों के साथ अन्य वाहनों के चालकों को भी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है. वाहन चालकों का कहना है कि कई बार टायर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और पुल पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी इसी पुल और सड़क की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन कुछ ही महीनों में उसकी स्थिति फिर बदहाल हो गई. इससे यह सवाल उठ रहा है कि मरम्मत कार्यों में आखिर किस स्तर की गुणवत्ता अपनाई जा रही है और निर्माण कार्यों की निगरानी कौन कर रहा है.
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि सीसीएल प्रत्येक वर्ष कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) तथा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के माध्यम से क्षेत्र में विकास कार्य कराने का दावा करती है. इन योजनाओं का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पुल, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है. इसके बावजूद खनन क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सड़कें और पुल बदहाल हैं. ऐसे में सीएसआर और डीएमएफटी मद में खर्च की जा रही राशि की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये के कोयला उत्पादन और परिवहन से राजस्व अर्जित करने वाली सीसीएल यदि अपने ही खनन क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को सुरक्षित नहीं रख पा रही है, तो विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं. उनका आरोप है कि मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता की जगह औपचारिकता निभाई जा रही है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
सबसे अहम बात यह है कि पूरे मामले पर सीसीएल के जिम्मेदार और वरिष्ठ अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, लगातार संपर्क और सवालों के बावजूद अधिकारी जवाब देने से मुंह फेर रहे हैं. इससे यह आशंका और गहरी हो रही है कि कहीं न कहीं निर्माण और मरम्मत कार्यों में हुई अनियमितताओं पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है.
ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और राहगीरों ने पुल और सड़क की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, मरम्मत कार्यों की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच, सीएसआर एवं डीएमएफटी मद से हुए खर्च का सार्वजनिक ऑडिट, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और संवेदकों की जवाबदेही तय करने तथा पुल और सड़क का स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह क्षतिग्रस्त पुलिया और जर्जर पुल किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सीसीएल प्रबंधन और संबंधित विभागों की होगी.
यह भी पढ़ें: चांसलर पोर्टल नहीं खुलने से विज्ञान के छात्र नामांकन से वंचित, ए.के. सिंह कॉलेज ने शुरू किया हस्ताक्षर अभियान