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गिरिडीह/डेस्क: गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के माहुरी गांव स्थित मंडेय प्रांगण में दहेज मुक्त विवाह का आयोजन किया गया. इस खास मौके पर ग्राम छोटकी सिधाबारा, जिला बोकारो निवासी नीलम कुमारी एवं बगोदर के ग्राम माहुरी निवासी नारायण महतो का विवाह पूरे वैदिक रीति-रिवाज के साथ सादगीपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ. इस विवाह की खास बात यह रही कि बिना दहेज के पारंपरिक रस्मों का पालन करते हुए एक ही दिन में लग्न, हल्दी, कलश स्थापना और विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं.
परिवार को अंगवस्त्र भेंट कर किया गया सम्मानित
दोनों परिवारों के बीच रिश्ते को जोड़ने में बेनी महतो की अहम भूमिका रही. विवाह समारोह में दोनों पक्षों के परिजनों एवं ग्रामीणों की मौजूदगी में नवदंपति को शुभकामनाएं दी गईं. इस अवसर पर कुड़मी विकास मोर्चा, बगोदर इकाई ने नवविवाहित जोड़े नारायण महतो एवं नीलम कुमारी को पुष्पमाला और पीला अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. वहीं लग्न कराने वाले सोमर महतो, किसुन महतो तथा वर-वधू की माताओं मसोमात शांति देवी एवं मसोमात चिंता देवी को भी पीला अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया.
दहेज़ प्रथा बनी अभिशाप
समारोह को संबोधित करते हुए सामाजिक आंदोलनकारी छोटन प्रसाद छात्र ने कहा कि कुड़मी समाज में दहेज प्रथा अन्य समाजों की नकल करते हुए धीरे-धीरे बढ़ी है, जो अब सामाजिक अभिशाप बनती जा रही है. उन्होंने कहा कि दहेज के कारण लोगों को जमीन-जायदाद बेचनी पड़ रही है और बेटियों को बोझ समझा जाने लगा है. समाज को इस कुरीति के खिलाफ एकजुट होकर अपने-अपने घरों से इसकी समाप्ति की शुरुआत करनी होगी.
कार्यक्रम में कुड़मी विकास मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार, प्रखंड अध्यक्ष कुंजलाल महतो, कोषाध्यक्ष डालेश्वर महतो, इंजीनियर त्रिभुवन महतो, शिक्षाविद शंकर दयाल, हेमंत महतो, ढालचंद पटेल, प्रेमचंद प्रसाद, संजय कुमार, टहल महतो, रामप्रसाद महतो, सोमर महतो, रघुनंदन महतो, प्रकाश महतो, वीरेंद्र महतो सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे. यह दहेज मुक्त विवाह क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में चर्चा का विषय बना रहा.