फिरोज आलम/न्यूज़11 भारत
रजरप्पा/डेस्क: गोला प्रखण्ड के सरलाकला गांव के प्रगतिशील किसान रचिया महतो ने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला हो तो खेती से भी किस्मत बदली जा सकती है. परंपरागत खेती को छोड़कर उन्होंने बेबी कॉर्न की खेती शुरू की और आज वे रामगढ़ जिले के पहले व्यावसायिक बेबी कॉर्न उत्पादक बनकर जिले भर के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
रचिया महतो लगभग 2 एकड़ जमीन में बेबी कॉर्न की खेती कर रहे हैं. उनकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि वे हर 15 दिन पर 25 डिसमिल में बुवाई करते हैं, जिससे बाजार में लगातार सप्लाई बनी रहती है. मालूम हो बेबी कॉर्न का उपयोग सूप, चिल्ली, सब्जी और सलाद में होता है. बड़े होटलों और शहरी बाजारों में इसकी भारी मांग है.
रचिया महतो को बाजार की समझ भी बखूबी है. वे अपनी फसल रोजाना बस से रांची भेजते हैं, जहां बेबी कॉर्न 100 रुपये प्रति किलो के भाव पर आसानी से बिक जाते हैं. पिछले 10 वर्षों से वे कोलकाता में भी सप्लाई कर रहे हैं, जहां उन्हें 240 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिलता है.
रचिया महतो की सोच सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं है. बेबी कॉर्न बेचने के बाद बचा हुआ डंठल और पत्ते वे गाय-भैंस के लिए हरे चारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इसी दोहरे फायदे के कारण वे सालों भर इस फसल को उगाते हैं.
उनकी सफलता से प्रेरित होकर अब अन्य किसान भी आगे आए हैं. मुरुडीह गांव से प्रफुल महतो और संग्रामपुर से विनोद महतो भी अब बेबी कॉर्न की खेती कर रहे हैं. अभी यह खेती गोला प्रखण्ड के सरला और सरगामपुर पंचायत तक सीमित है, लेकिन रचिया महतो के प्रयास से यह पूरे जिले में फैलने की उम्मीद है.
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि कम लागत, कम समय और अधिक मुनाफे वाली बेबी कॉर्न की खेती से किसानों की आय दोगुनी हो सकती है. रचिया महतो जैसे किसान ही झारखंड की कृषि को नई ऊंचाई देंगे. क्षेत्र के लोग उनकी इस पहल की दिल से सराहना कर रहे हैं.
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