फलक शमीम/न्यूज11 भारत
हजारीबाग/डेस्क: हजारीबाग जिला के टाटीझरिया प्रखंड के बिशाय जंगल में इन दिनों श्रद्धा, कौतूहल और आस्था का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. जंगल के बीचों-बीच एक पत्थर पर उभरी सात नागों की आकृति पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. आलम यह है कि यहां दिनों-दिन लोगों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है, और इस अद्भुत दृश्य को अपनी आँखों से देखने के लिए लोग दूर-दराज के इलाकों से बडी संख्या में पहुंच रहे हैं. जैसे ही पत्थर पर नाग आकृति उभरने की खबर फैली, बिशाय का यह शांत जंगल एक प धार्मिक स्थल के रूप में तब्दील हो गया. अब यहाँ बकायदा 'भगतिनों' ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू कर दी है.
श्रद्धालु इस आकृति को साक्षात नाग देवता का रूप मानकर शीश नवा रहे हैं. श्रद्धा का आलम यह है कि लोग पास ही बहने वाली नदी से जल लाकर आकृति पर जलाभिषेक कर रहे हैं. मंदिर की तरह यहाँ भी मन्नतें गछने और कबूली मांगने का सिलसिला तेजी से शुरू हो चुका है. क्षेत्र धूप-अगरबत्ती की खुशबू और जयकारों से गूंजने लगा है. इस पूरी घटना को लेकर क्षेत्र में दो तरह की विचारधाराएं देखने को मिल रही हैं जिसमें श्रद्धालुओं का पक्ष और दूर-दराज से आ रहे लोगों का साफ मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक साक्षात दैवीय चमत्कार है. लोग इसे भगवान की विशेष कृपा से जोड़कर देख रहे हैं.
दूसरी ओर, समाज के कुछ प्रबुद्ध और विज्ञान सम्मत सोच रखने वाले लोगों का कहना है कि इसके पीछे कोई चमत्कार नहीं है. यह महज एक प्राकृतिक संयोग है. बारिश, तेज हवा और समय के साथ पत्थरों पर होने वाले प्राकृतिक कटाव के कारण अक्सर इस तरह की आकृतियां उभर आती हैं, जिसे इंसानी दिमाग अपनी कल्पना के अनुसार कोई रूप दे देता है. हालांकि हकीकत चाहे जो हो लेकिन बिशाय जंगल में कौतूहल बरकरार है. यहां सुबह से लेकर शाम तक लोगों का आना-जाना लगातार जारी है.
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