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पाकुड़/डेस्क: काठीकुंड नक्सली हमले में शहीद हुए तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार और उनके साथ शहीद पांच पुलिस जवानों को गुरुवार को पुलिस परिवार ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में पुलिस अधिकारियों, जिला प्रशासन के पदाधिकारियों और शहीदों के परिजनों ने वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया.
कार्यक्रम में पाकुड़ के एसपी अनुदीप सिंह, एसडीपीओ कुमार गौरव, डीडीसी अरविंद कुमार लाल, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, डीटीओ मो. मुजाहिद अंसारी समेत कई अधिकारियों ने शहीद एसपी अमरजीत बलिहार की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर वीर आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई. इस अवसर पर एसपी ने शहीद जवानों के परिजनों और हमले में घायल हुए निजी चालक धनराज मड़ैया को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया.
'शहीदों के बलिदान से नक्सल मुक्त हुआ संथाल परगना'
सभा को संबोधित करते हुए एसपी अनुदीप सिंह ने कहा कि एसपी अमरजीत बलिहार और उनके साथियों का सर्वोच्च बलिदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा. उन्होंने कहा कि आज यदि पाकुड़ जिला और पूरा संथाल परगना नक्सल मुक्त है, तो इसमें इन वीर शहीदों की शहादत का बड़ा योगदान है. उन्होंने कहा कि पुलिस परिवार जनता की सुरक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहेगा. एसपी ने घोषणा की कि नक्सली हमले में शहीद हुए अन्य पांच जवानों की स्मृति में भी जल्द प्रतिमाएं स्थापित कराई जाएंगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें.
2 जुलाई 2013 का काला दिन
गौरतलब है कि 2 जुलाई 2013 को तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार दुमका में आयोजित डीआईजी की बैठक से लौट रहे थे. काठीकुंड थाना क्षेत्र के जमनीनाला के पास घात लगाए नक्सलियों ने उनके काफिले पर हमला कर दिया. इस हमले में एसपी अमरजीत बलिहार, अंगरक्षक चंदन थापा, चालक वीरेंद्र श्रीवास्तव, जवान राजीव कुमार शर्मा, संतोष मंडल और मनोज हेम्ब्रम शहीद हो गए थे. वहीं निजी चालक धनराज मड़ैया और एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे.
बड़े अभियान के बाद बदली तस्वीर
इस हमले के बाद झारखंड पुलिस ने संथाल परगना में व्यापक नक्सल विरोधी अभियान चलाया. पाकुड़, दुमका और गोड्डा सहित पूरे क्षेत्र में लगातार कार्रवाई की गई. कई नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई और कई मुठभेड़ों में मारे गए. पुलिस का कहना है कि लगातार चलाए गए अभियानों के परिणामस्वरूप आज संथाल परगना क्षेत्र नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुका है.
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