जलापूर्ति ठप

गिरिडीह: गावां में चार दिनों से जलापूर्ति ठप, लोगों का फूटा गुस्सा; ठेकेदार व समिति पर मिलीभगत का आरोप

गावां प्रखंड के कई गाँवों में ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत पिछले चार दिनों से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप है.

By News11 Bharat
गिरिडीह: गावां में चार दिनों से जलापूर्ति ठप, लोगों का फूटा गुस्सा; ठेकेदार व समिति पर मिलीभगत का आरोप

संदीप बरनवाल/न्यूज़11 भारत
गावां/डेस्क:
गिरिडीह जिले के गावां प्रखंड के अमतरो, गावां, माल्डा, नगवां एवं पटना पंचायत में ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत पिछले चार दिनों से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप है. जलापूर्ति बंद होने से हजारों लोगों के सामने पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. मजबूरन ग्रामीणों को चापाकलों एवं कुआँ से पानी लाकर अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करनी पड़ रही है. रविवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने जलापूर्ति केंद्र पहुंचकर हंगामा किया और जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने की मांग की.

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस ग्रामीण जलापूर्ति योजना से करीब 1300 उपभोक्ता जुड़े हुए हैं. प्रत्येक उपभोक्ता से ₹62 प्रतिमाह जल कर के रूप में लिया जाता है. इस प्रकार हर महीने लगभग ₹60 से ₹70 हजार की राशि की वसूली होती है. इसके बावजूद योजना का समुचित रखरखाव नहीं किया जाता. लोगों का कहना है कि मोटर, पाइपलाइन या अन्य छोटी-छोटी तकनीकी खराबियों को भी समय पर ठीक नहीं कराया जाता, जिससे आए दिन जलापूर्ति बाधित रहती है.

ग्रामीणों ने ठेकेदार एवं जलापूर्ति समिति पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि उपभोक्ताओं से नियमित शुल्क लेने के बावजूद सुविधा नहीं दी जा रही है. चार दिनों से जलापूर्ति बंद रहने के बावजूद किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति ने समस्या के समाधान की दिशा में गंभीर पहल नहीं की. इससे लोगों में भारी नाराजगी है.

महिलाओं ने बताया कि सुबह से ही पानी की व्यवस्था करने में घंटों समय लग जा रहा है. पीने, भोजन बनाने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए दूर-दूर से पानी ढोना पड़ रहा है. सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को हो रही है. भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि जब हर माह नियमित रूप से शुल्क लिया जा रहा है तो फिर जलापूर्ति व्यवस्था सुचारु रखने की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की है. यदि समय पर रखरखाव किया जाता तो चार दिनों तक लोगों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ता.

आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर ठेकेदार एवं जलापूर्ति समिति की जवाबदेही तय की जाए. साथ ही खराब मशीनों एवं उपकरणों की तत्काल मरम्मत कर जलापूर्ति शुरू कराई जाए. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र जलापूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन एवं संबंधित विभाग की होगी.

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