4 दिन में 10 मिलियन फॉलोअर्स.. क्या 2029 में 'कॉकरोच पार्टी' लड़ेगी चुनाव? फाउंडर अभिजीत ने पहली बार खोले पत्ते

By Mansi Kumari
4 दिन में 10 मिलियन फॉलोअर्स.. क्या 2029 में 'कॉकरोच पार्टी' लड़ेगी चुनाव? फाउंडर अभिजीत ने पहली बार खोले पत्ते

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न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
भारत की राजनीति में एक ऐसा नाम अचानक उभरकर सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है- 'कॉकरोच जनता पार्टी'. महज तीन-चार दिन पहले शुरू हुआ यह आंदोलन अब करोड़ों युवाओं की चर्चा का विषय बन चुका हैं. इस नई राजनीतिक मुहिम के पीछे है 30 वर्षीय अभिजीत दीपके, जिन्होनें हाल ही में अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर्स पूरा किया हैं.

दिलचस्प बात यह है कि एक हफ्ते पहले एक अभिजीत नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे लेकिन फिर देश के चीफ जस्टिस की एक टिप्पणी ने पूरी कहानी बदल दी. सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' और 'पैरासाइट्स' यानी परजीवियों से किए जाने के बाद अभिजीत ने इसे युवाओं के अपमान के रूप में लिया और देखते ही देखते एक राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत कर दी.

एक इंटरव्यू में अभिजीत ने कहा कि उन्हें 'कॉकरोच' शब्द से व्यक्तिगत दिक्कत नहीं थी लेकिन जब यह शब्द देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से आया, तब यह पूरे युवा वर्ग के लिए एक बड़ा झटका बन गया. उन्होंने कहा कि संविधान अभिव्यक्ति की आजादी देता है और अगर उसी संविधान की रक्षा करने वाला व्यक्ति युवाओं को कॉकरोच कहे तो यह बेहद खतरनाक संकेत हैं. अभिजीत ने दो टूक कहा, 'हां अगर सवाल यह है कि क्या मैं वही कॉकरोच हूं तो जवाब है- हूं'.

चार दिन में लाखों युवा कैसे जुड़े?
अभिजीत के मुताबिक, यह कोई प्रायोजित या प्लान्ड कैंपेन नहीं था. यह देश के युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट हैं. उनका दावा है कि पार्टी की वेबसाइट पर तीन लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके है जबकि इंस्टाग्राम पर लाखों लोग उनसे जुड़ गए हैं. दिल्ली में कॉकरोच मास्क पहनकर युवाओं ने यमुना सफाई अभियान तक शुरू कर दिया. सोशल मेदा पर यह आंदोलन तेजी से वायरल हो रहा है और कई विपक्षी नेताओं ने भी इस मुहिम में दिलचस्पी दिखाई हैं.

क्या केजरीवाल से हाथ मिलाएगी कॉकरोच पार्टी?
अभिजीत का नाम आम आदमी पार्टी से भी जुड़ चुका हैं. उन्होंने बताया कि वह 2020 से 2023 तक AAP के कम्युनिकेशन विभाग में काम कर चुके हैं. उन्होंने माना कि अरविंद केजरीवाल के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल से वह प्रभावित थे लेकिन अब उनका मकसद पूरी तरह स्वतंत्र राजनीतिक आंदोलन खड़ा करना हैं. 

उन्होंने साफ़ कहा कि Gen-Z नहीं चाहता कि कोई पारंपरिक राजनीतिक दल इस आंदोलन का हिस्सा बने. अभिजीत ने कहा "अगर कोई समर्थन देना चाहता है तो दे सकता है लेकिन यह आंदोलन किसी भी पुरानी पार्टी की छाया से दूर रहेगा."

भरता का Gen-Z हमेशा से यही था
बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में हाल के वर्षों में हुए युवा आंदोलनों का जिक्र करते हुए अभिजीत ने कहा कि भारत का युवा भी अब जाग चुका हैं. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर पूछते थे कि भारत का Gen-Z आखिर कहा है लेकिन अब जवाब साफ है- "रत का Gen-Z यही है और बोल रहा है." उनके मुताबिक, यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आने वाले समय में देश की राजनीति का एजेंडा बदलने की कोशिश करेगा.

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क्या यह सिर्फ इंटरनेट ट्रेंड हैं?
आलोचक इसे कुछ दिनों का सोशल मीडिया ट्रेंड बता रहे है लेकिन अभिजीत का दावा है कि यह आंदोलन लंबे समय तक चलेगा. उन्होंने कहा कि युवाओं की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं. अब पार्टी उन युवाओं से सीधे संवाद करेगी, जिन्होनें रजिस्ट्रेशन कराया हैं. उनसे पूछा जाएगा कि देश की राजनीति किन मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए और युवा भारत का भविष्य कैसा देखना चाहता हैं.

पांच सूत्रीय एजेंडों ने मचाई हलचल
कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट पर जारी पांच सूत्रीय एजेंडा ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी हैं. पार्टी की प्रमुख मांगों में शामिल हैं. जैसे किसी भी चीफ जस्टिस को रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा सीट या कोई सरकारी पद नहीं मिलेगा. वैध वोट काटने वाले चुनाव आयुक्त को यूएपीए (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया जाएगा. महिलाओं को 33% नहीं बल्कि 50% आरक्षण और कैबिनेट में आधी जगह मिलेगी. अंबानी और अडानी के मालिकाना हक वाले मीडिया घरानों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे. अब सवाल यह है कि क्या सच में आज के भारत में यह सब करना मुमकिन है या यह सब सिर्फ क्लिक्स और सुर्खियां बटोरने के लिए हैं?

इस पर अभिजीत का कहना है कि मुझे लगता है कि यह इस बारे में है कि एक आदर्श स्थिति क्या होनी चाहिए और हमें किस दिशा में प्रयास करना चाहिए. हम एक ऐसे भारत के लिए संघर्ष कर रहे हैं जहां सभी संस्थान पूरी तरह स्वतंत्र हों, चाहे वह न्यायपालिका हो, चुनाव आयोग हो या फिर मीडिया. आज भारतीय लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ा खतरा यह है कि ये सभी संस्थान सत्ताधारी दल के इशारे पर काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जो कि एक बेहद खतरनाक संकेत है.

हिंदू-मुस्लिम की राजनीति से युवा परेशान
अभिजीत ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में देश की राजनीति सिर्फ हिंदू-मुस्लिम बहस तक सीमित हो गई है जबकि दुनिया AI, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ रही हैं. उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के युवा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की बात करते है जबकि भारत में युवाओं को धर्म आधारित राजनीति में उलझा दिया गया हैं.

नीट पेपर लीक पर सरकार को घेरा
अभिजीत ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर भी सरकार पर हमला बोला. उनहोंने कहा कि एक छात्र ने परीक्षा घोटाले के कारण आत्महत्या कर ली लेकिन किसी मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया. उन्होंने कहा "एक बच्चा जो कल डॉक्टर बन सकता था, वह सिस्टम की नाकामी की वजह से अपनी जान दे देता है और सत्ता में बैठे लोग अपनी कुर्सियों पर बने रहते हैं. यही इस सड़ी-गली राजनीति की असल तस्वीर हैं."

क्या 2029 में चुनाव लड़ेगी कॉकरोच पार्टी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह आंदोलन 2029 के लोकसभा चुनाव तक पहुंचेगा? इसपर अभिजीत ने कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. फिलहाल उनका फोकस युवाओं की राय सुनने और आंदोलन को मजबूत करने पर हैं. हालांकि उन्होंने यह जरुर कहा कि देश के युवा अब पारंपरिक राजनीति से ऊब चुके है और एक नए विकल्प की तलाश में हैं.

देश को मिलेंगे नए चेहरे
अभिजीत का दावा है कि आने वाले समय में यह आंदोलन भारतीय राजनीतिको नए और ज्यादा पढ़े-लिखे चेहरे देगा. उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीति में कोई भी नेता सच मायनों में Gen-Z का प्रतिनिधित्व नहीं करता. उनके मुताबिक, आने वाले वर्षों में युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर गुस्सा नहीं निकालेंगे, बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से राजनीतिक बदलाव की दिशा तय करेंगे. 

फंडिंग और रणनीति पर क्या बोले?
फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अभिजीत ने कहा कि अभी आंदोलन शुरुआती चरण में है और टीम जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती. उनका कहना है कि वे ऐसा कोई कदम नहीं उठा चाहते जिससे आंदोलन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचे. उन्होंने कहा कि सिस्टम में बैठे लोग चाहते है कि यह आंदोलन दो दिन में खत्म हो जाए लेकिन हम उन्हें यह मौका नहीं देंगे.

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