राजेश जायसवाल, महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा से सटे सोनौली और नौतनवा क्षेत्र में कपड़ों की तस्करी का बड़ा नेटवर्क संचालित है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार सीमावर्ती बाजारों में कई ऐसी दुकानें संचालित हैं, जहां सूरत, मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, गोरखपुर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों से अलग-अलग नामों पर ट्रांसपोर्ट के माध्यम से बड़ी मात्रा में रेडीमेड कपड़े मंगाए जाते हैं। आरोप है कि बाद में इन्हें कैरियरों के जरिए नेपाल भेज दिया जाता है।
कैरियरों के माध्यम से तस्करी
सूत्रों का दावा है कि नेपाली व्यापारी और ग्राहक भारतीय क्षेत्र की इन दुकानों पर पहुंचकर कपड़ों का चयन करते हैं और भुगतान कर जाते हैं। इसके बाद दुकानदार अपने नेटवर्क में शामिल कैरियरों के माध्यम से कपड़ों की खेप नेपाल के विभिन्न स्थानों तक पहुंचाते हैं। बताया जाता है कि इस नेटवर्क की नेपाल स्थित ट्रांसपोर्ट और कोरियर संचालकों से भी गहरी पकड़ है, जहां से माल काठमांडू, पोखरा और अन्य प्रमुख शहरों तक भेजा जाता है।
कथित नेटवर्क में महिलाएं भी शामिल
आरोप है कि इस कथित नेटवर्क में सैकड़ों महिला कैरियर भी लगी हुई हैं, जो छोटे-छोटे हिस्सों में कपड़ों को सीमा पार ले जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन करोड़ों रुपये मूल्य के कपड़े इस तरीके से नेपाल भेजे जाते हैं। जानकारों के अनुसार, नेपाल में एक सूट पर लगभग 200 तक सीमा शुल्क लग सकता है। आरोप है कि तस्करी में शामिल नेटवर्क कैरियरों को प्रति सूट लगभग 100 से 120 तक कैरिंग चार्ज देकर कपड़े नेपाल पहुंचा देता है, स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि इस कथित कारोबार से जुड़े कुछ व्यापारियों ने कम समय में करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
लोगों ने की जांच की मांग
क्षेत्रवासियों ने सीमा शुल्क विभाग, पुलिस, एसएसबी, डीआरआई तथा अन्य संबंधित एजेंसियों से सीमावर्ती बाजारों, ट्रांसपोर्ट गोदामों और संदिग्ध दुकानों की संयुक्त जांच कराने, माल की खरीद-बिक्री एवं परिवहन अभिलेखों का सत्यापन करने तथा यदि अनियमितता मिले तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।