बृजेश मिश्रा, अमेठी। अमेठी में स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। जौनपुर से अमेठी पहुंची एक गर्भवती महिला को रेलवे स्टेशन से घर जाते समय अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला दर्द से कराहती रही और एंबुलेंस का इंतजार करती रही। वहीं, आसपास के लोग मदद के लिए आगे आए। हालांकि एंबुलेंस के पहुंचने में हुई देरी के कारण महिला को सड़क किनारे ही प्रसव के लिए मजबूर होना पड़ा।
काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से उतरते ही शुरू हुआ दर्द
जानकारी के अनुसार, जौनपुर के बादशाहपुर मालीपुर निवासी सूरज अपनी गर्भवती पत्नी ज्योति के साथ अमेठी में अपने रिश्तेदार के यहां रह रहे हैं। मंगलवार शाम दोनों काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से अमेठी पहुंचे थे। ट्रेन से उतरकर स्टेशन से बाहर निकलने के बाद वह स्टेशन रोड पर पहुंचे ही थे कि तभी ज्योति को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
राहगीरों ने संभाला मोर्चा, एंबुलेंस नहीं आई
महिला की हालत देखकर आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल एंबुलेंस को सूचना दी। लोगों ने महिला को पन्नी लगाकर ढक दिया और उसकी मदद में जुट गए। लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक, सूचना देने के बाद भी एंबुलेंस को मौके तक पहुंचने में आधे घंटे से अधिक समय लग गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटनास्थल से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमेठी की दूरी महज करीब 500 मीटर बताई जा रही है। इसके बावजूद एंबुलेंस को पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही महिला ने सड़क किनारे एक के बाद एक दो बच्चियों को जन्म दे दिया।
मां और बच्चियां अस्पताल में, एक नवजात रेफर
बाद में एंबुलेंस मौके पर पहुंची और महिला तथा दोनों नवजात बच्चियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमेठी ले जाया गया। सीएचसी के डॉ देवेश के अनुसार महिला की हालत सामान्य है और दोनों बच्चियां भी ठीक हैं। हालांकि, एक बच्ची को मामूली समस्या होने के कारण बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
500 मीटर की दूरी में आधे घंटे की देरी पर जवाब कौन देगा?
अब सवाल स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवा पर है। आखिर महज 500 मीटर की दूरी तय करने में एंबुलेंस को आधे घंटे से अधिक समय क्यों लगा? क्या आपातकालीन सेवा की व्यवस्था इतनी धीमी है कि प्रसव जैसी गंभीर स्थिति में भी मरीज को समय पर मदद नहीं मिल सकती?क्या इन सवालों के जवाब स्वास्थ्य विभाग देगा।