Hardoi Politics

Hardoi Politics: राजाबक्स के 'सरकश' तेवरों के बीच भाजपा को याद आए ’पुराने बागी’ गंगाभक्त

सदर विधानसभा सीट पर चुनावी बिसात अभी पूरी तरह बिछी नहीं है, लेकिन मोहरे अपनी जगह खोजने लगे हैं।

By : विकास जैन
Hardoi Politics: राजाबक्स के 'सरकश' तेवरों के बीच भाजपा को याद आए ’पुराने बागी’ गंगाभक्त

Hardoi Politics: राजाबक्स के 'सरकश' तेवरों के बीच भाजपा को याद आए ’पुराने बागी’ गंगाभक्त

बृजेश ’कबीर’, हरदोई: सदर विधानसभा सीट पर चुनावी बिसात अभी पूरी तरह बिछी नहीं है, लेकिन मोहरे अपनी जगह खोजने लगे हैं। भाजपा के पूर्व प्रत्याशी (2017) राजा बक्श सिंह के बागी तेवर, हर हाल में चुनाव लड़ने के उनके एलान और सपा मुखिया अखिलेश यादव संग उनकी तस्वीरों ने लोकल पॉलिटिक्स में एक हलचल पैदा कर दी है। इसी बीच भाजपा जिला कार्यालय के नवीनीकृत बैठक कक्ष को जनसंघ कालीन दिग्गज नेता बाबू गंगाभक्त सिंह के नाम समर्पित किया गया है। लोकार्पण भाजपा अवध क्षेत्र अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी ने किया।

घटनाओं का यह क्रम संयोग मात्र है या इसके पीछे कोई सियासी संदेश भी है, इस पर चर्चाएं स्वाभाविक हैं। सदर सीट पर भाजपा की राजनीति लम्बे समय से आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल के इर्द-गिर्द घूमती रही है। राजाबक्स सिंह इस मुकाबले के पुराने चेहरे हैं। विधानसभा चुनाव-2017 में बतौर भाजपा प्रत्याशी नितिन अग्रवाल को कड़ी चुनौती दी थी, लेकिन 5,109 मत से असेम्बली दूर रह गई थी। साल 2022 में वह चुनावी मैदान से दूर रहे। अब उनके फिर ताल ठोकने ने दशक पुराने मुकाबले की यादें ताजा कर दी हैं।

लखनऊ से निकली तस्वीर ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

सितंबर में लखनऊ पब्लिक स्कूल में शिक्षक सम्मान समारोह की तस्वीरों में राजाबक्स सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात करते दिखे। तस्वीरें सामने आने के बाद उनके अगले राजनीतिक हरावल दस्ताकदम को लेकर अटकलें तेज हो गईं। हालांकि, राजाबक्स ने तब सपा में शामिल होने की बात से इनकार किया था। कार्यक्रम में शामिल होने की वजह व्यक्तिगत रिश्ते बताए थे। हालांकि, तस्वीरों को लेकर सदर की सियासत में चर्चा जरूर बढ़ी है।

पुराने चेहरे से नया संदेश ?

राजाबक्स के चुनाव लड़ने के एलान और तस्वीरों से पैदा हलचल के बीच भाजपा जिला कार्यालय के नवीनीकृत सभागार का नाम बाबू गंगाभक्त सिंह के नाम पर रखना राजनीतिक नजरिये से अहम माना जा रहा है। गंगाभक्त सिंह संगठनात्मक दौर के उन नेताओं में थे, जिनकी पहचान पार्टी के प्रति समर्पण और लंबे राजनीतिक अनुभव से बनी। उनके जनसंघ का प्रदेश अध्यक्ष रहते अटल बिहारी वाजपेई महामंत्री थे, इससे गंगाभक्त की वरिष्ठता समझी जा सकती है। वह चार बार विधायक, एक बार सांसद, दो बार राज्य के कैबिनेट मंत्री, हथकरघा निगम अध्यक्ष, यूपी राज्यसभा परिषद अध्यक्ष और योजना आयोग उपाध्यक्ष रहे। ऐसे नेता की स्मृति को जिला कार्यालय में स्थान देना संगठन की विरासत स्थापित करने संग क्षत्रियों को गर्वानुभूति दिलाने का प्रयास है।

बाबू जी की प्रेरणा से बना सामाजिक-राजनीतिक पथिक: बब्बन

भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने सोशल मीडिया पोस्ट में बाबू गंगाभक्त सिंह से बचपन से मिले सानिध्य और मार्गदर्शन का जिक्र किया है। लिखा, उन्हीं से प्रेरित होकर वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षित स्वयंसेवक बने। विद्यार्थी परिषद से सामाजिक-राजनीतिक यात्रा प्रारम्भ की। बब्बन ने बाबू गंगाभक्त सिंह स्मृति सभागार के लोकार्पण अवसर को भावुक और अविस्मरणीय बताया। कार्यकर्ताओं से उनके विचारों, निष्ठा और समर्पण को अपनाने की अपील की।

चुनौती: पुराने समीकरण-एकजुटता बनाए रखना

सदर के सियासी समीकरणों में क्षत्रिय समाज की भूमिका और राजाबक्स सिंह की सक्रियता के बीच इस आयोजन को समाज तक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल इतना तय है, सदर सीट पर चुनावी चर्चा ने रफ्तार पकड़ ली है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा, राजाबक्स का एलान केवल दबाव की राजनीति है या वह वास्तव में कोई अलग राह चुनते हैं। भाजपा की चुनौती पुराने समीकरण साधने संग संगठन की एकजुटता बनाए रखने की भी है।

’बागी गंगाभक्त’ ने ’भाजपा बचाओ समिति’ बना दी थी नेतृत्व को चुनौती

साल 2002 में सूबे की सियासत में तब दिलचस्प मोड़ आया, जब भाजपा के असंतुष्ट 35 विधायकों ने बाबू गंगाभक्त सिंह के नेतृत्व में भाजपा बचाओ समिति बनाई। उन्होंने मायावती सरकार में भाजपा की भूमिका और पार्टी के तत्कालीन नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। गंगाभक्त सिंह ने पार्टी के मंत्रियों को सरकार से हटाकर बाहर से समर्थन देने और लालजी टंडन को भाजपा विधायक दल के नेता पद से हटाने की मांग की थी। पार्टी ने ’भाजपा बचाओ समिति’ को आत्मघाती दस्ता और जवाब में गंगाभक्त ने समिति को हरावल दस्ता (अग्रिम मोर्चे के योद्धा) बताया था। अक्टूबर 2002 में उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।