अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर में ईवीएम वेयरहाउस से 24 मशीनें कम मिलने की खबर ने जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जिला मुख्यालय में पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने इस गोदाम में गिनती हुई तो आठ बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट रिकॉर्ड से मेल नहीं खाईं। मामला अब सिर्फ चोरी की आशंका तक सीमित नहीं है। असल सवाल यह है कि चेतावनी छह महीने पहले मिल चुकी थी, फिर भी कार्रवाई में इतनी देर क्यों हुई।
मार्च में टूटी मिली थी दीवार
जानकारी के अनुसार तहसील भवन जर्जर हो चुका था और उसे गिराने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी बीच 16 मार्च को ईवीएम वेयरहाउस के पीछे की दीवार क्षतिग्रस्त मिली। संवेदनशील चुनावी सामग्री के लिहाज से यह साफ खतरे का संकेत था। शिकायत के अनुसार इसके बावजूद मशीनों की असल संख्या का रिकॉर्ड से विस्तृत मिलान बाद में कराया गया। यही देरी अब जांच का अहम बिंदु बन गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि भवन तोड़ने की कार्रवाई शुरू होने के बाद मशीनों को तुरंत सुरक्षित जगह क्यों नहीं भेजा गया।
21 सितंबर को शिफ्ट हुईं मशीनें, सत्यापन में खुली कमी
ईवीएम को आखिरकार 21 सितंबर को पुराने तहसील परिसर से हटाकर पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में चल रहे तहसील कार्यालय के भूतल पर कक्ष क्रमांक 6 में रखा गया। इसके बाद 24 से 28 सितंबर के बीच भौतिक सत्यापन हुआ। रिकॉर्ड और मौके पर मिली मशीनों की संख्या में अंतर यहीं पकड़ में आया। शिकायत में गायब मशीनों के सीरियल नंबर भी दर्ज हैं। 30 सितंबर को सीतापुर प्राथमिक विद्यालय के सहायक शिक्षक फूल सिंह, तहसीलदार वेद प्रकाश सिंह और बस्ती प्राथमिक विद्यालय के सहायक शिक्षक संजय निगम के साथ कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली प्रभारी उमेश उपाध्याय ने बताया कि शिकायत मिली है और जांच शुरू हो गई है।
2014 से रखी थीं मशीनें
शिकायत के अनुसार, साल 2014 के पंचायत चुनाव के लिए इसी वेयरहाउस में 620 कंट्रोल यूनिट और 1670 बैलेट यूनिट रखी गई थीं। ये मशीनें लंबे समय तक वहीं पड़ी रहीं। ऐसे में जांच सिर्फ यह पता करने तक सीमित नहीं रुकेगी कि 24 मशीनें कब गायब हुईं। यह भी देखना होगा कि 2014 से 2026 के बीच कितनी बार भौतिक सत्यापन हुआ। सत्यापन किसने किया और हर बार रिकॉर्ड व मौके की स्थिति में क्या फर्क मिला।
निगरानी और रिकॉर्ड पर उठे सवाल
ईवीएम चुनाव प्रक्रिया की संवेदनशील सरकारी सामग्री है। इसलिए पुराने भवन में उसके भंडारण पर सवाल उठाना स्वाभाविक है। गोदाम की रोज की निगरानी किसके जिम्मे थी। आने-जाने का रजिस्टर रखा जाता था या नहीं और 2014 से रखी मशीनों की जवाबदेही किस अधिकारी या कर्मचारी की थी। इन सब बातों के जवाब अभी बाकी हैं।
फिहला पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि मशीनें चोरी ही हुई हैं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि मशीनें सच में बाहर गईं या कहीं और शिफ्ट हुईं और उसकी एंट्री रिकॉर्ड में नहीं हो पाई। अगर मार्च में ही मशीनें सुरक्षित जगह पहुंचाकर रिकॉर्ड से मिला ली जातीं तो कमी का पता काफी पहले चल सकता था।