गोण्डा: कहते हैं लोकतंत्र में जनता मालिक होती है, लेकिन अशोकवापुर गांव की तस्वीर देखकर लगता है कि यहां मालिक को अपनी ही चौखट तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विकासखंड कटरा बाजार की ग्रामसभा कोटिया मदारा के मजरा अशोकवापुर की वह सड़क, जो गांव की जीवनरेखा मानी जाती है, पिछले 25 वर्षों से विकास की फाइलों में शायद रास्ता तलाश रही है। अब जब पंचायत चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है तो ग्रामीणों को भी उम्मीद जगी है कि शायद इस बार नेताओं की नजर गड्ढों पर भी पड़ जाए।
जिलाधिकारी से सड़क मरम्मत की मांग
गांव निवासी दीप नारायण शुक्ला ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र देकर सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दुबहा बाजार संपर्क मार्ग से गांव तक जाने वाली यही एकमात्र सड़क है। वर्ष 2000 के बाद इस मार्ग पर न तो मरम्मत हुई और न ही कोई नया निर्माण। कभी खड़ंजे से सजी यह सड़क अब गड्ढों, कीचड़ और पानी का स्थायी पता बन चुकी है। बरसात आते ही सड़क का रूप ऐसा हो जाता है कि राहगीरों को यह तय करना मुश्किल पड़ जाता है कि वे सड़क पर चल रहे हैं या किसी खेत की मेड़ पार कर रहे हैं। ग्रामीण तंज कसते हैं कि यदि गड्ढों की गिनती पर कोई सरकारी योजना होती तो यह सड़क जिले में पहला स्थान जरूर हासिल कर लेती। हालत यह है कि स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रोज जोखिम उठाकर आवागमन करते हैं, जबकि एंबुलेंस और अन्य जरूरी वाहन गांव तक पहुंचने से पहले ही हार मान लेते हैं।
आश्वासन की मरम्मत, सड़क की नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई। जिलाधिकारी को भी पहले कई प्रार्थना-पत्र दिए गए, लेकिन हर बार आश्वासन की मरम्मत हुई, सड़क की नहीं। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है, जबकि मरीजों और गर्भवती महिलाओं को कई बार चारपाई के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
अशोकवापुर के कार्रवाई का इंतजार
अब ग्रामीणों ने एक बार फिर जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर तत्काल सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। गांव वालों का कहना है कि यदि विकास केवल भाषणों और शिलान्यास पट्टिकाओं तक सीमित रहेगा तो सड़कें नहीं, केवल वादे चमकेंगे। फिलहाल अशोकवापुर के लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। देखना यह होगा कि चुनावी दस्तक के साथ इस सड़क की किस्मत भी बदलती है या फिर अगले चुनाव तक विकास की गाड़ी इसी कीचड़ में फंसी रहती है। दिलचस्प है सड़क बनवाने वाले विभाग का पता नहीं चल पा रहा है। कार्यदाई के नोडल एवं पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन प्रमोद कुमार त्रिपाठी कहते हैं कि विभागो से रिपोर्ट मांगी जा रही है जल्द संबधित विभाग से प्रस्ताव बनवाए जाएंगे।