भोपाल। आयुष्मान भारत निरामयम विभाग ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 90 अस्पतालों को 24 घंटे के भीतर मान्यता के दस्तावेज देने को कहा है। अगर दस्तावेज नहीं मिले, तो गुरुवार से इन अस्पतालों के लाइसेंस निलंबित कर दिए जाएंगे। इन अस्पतालों पर आयुष्मान योजना में काफी गड़बडिय़ां करने के आरोप है। इनकी जांच करने के बाद विभाग ने उक्त अंतिम मौका दिया है। फिलहाल इन अस्पतालों में नए मरीज की भर्ती पर रोक लगा दी है।
बता दें कि मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज प्रदान करने वाले निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने अब तक का सबसे बड़ी कार्रवाई की है। चार मुख्य महानगरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के करीब 90 बड़े औरमध्यम अस्पतालों पर आयुष्मान योजना का शिकंजा कसा गया है। निरामयम विभाग ने कहा कि जिन अस्पतालों के पास प्रवेश स्तर प्रमाणपत्र नहीं है, उनमें आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती कर इलाज देने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग का यह आदेश तुरंत लागू कर दिया गया है।
आयुष्मान के लिए एनबीएच अनिवार्य
शासन ने एक अक्टूबर से आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों के लिए एनएबीएच यानि मान्यता प्रमाणपत्र की अनिवार्यता को लागू किया है। अधिकारियों ने बताया कि आयुष्मान योजना के लिए कुल 425 अस्पतालों को शामिल किया था। 30 सितंबर तक केवल 335 अस्पताल ही प्रमाणपत्र ला पाएं। शेष को सात दिन का मौका दिया गया, जिसकी अंतिम तिथि बुधवार की शाम को खत्म हो जाएगी।
केवल आदिवासी क्षेत्रों के अस्पतालों को छूट
आयुष्मान विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर महानगरों के अस्पतालों पर सीधी कार्रवाई की जा है। जल्द ही प्रदेश के अन्य सभी जिलों के अस्पताल भी इस नियम की जद में आएंगे। केवल आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों को इस कड़े नियम से फिलहाल अस्थायी राहत दी है, ताकि वहां मरीजों का इलाज प्रभावित न हो।
आयुष्मान भारत निरामयम विभाग भोपाल के सीईओ अरविंद शाह का कहना है कि आयुष्मान योजना में प्रदेश के अस्पतालों से काफी गड़बडिय़ां मिली है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद मान्यता दस्तावेज नहीं देने वाले चार महानगरों के 90 अस्पतालों को नोटिस दिया है। इन अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी है।