भोपाल। शहर में किसानों के प्रदर्शन के बीच सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई पहली बैठक में कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। मंत्रालय में करीब दो घंटे तक चली चर्चा के बाद अब दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी है। किसान मूंग खरीदी, ई-टोकन सिस्टम में बदलाव समेत अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गठित मंत्री समूह ने किसान प्रतिनिधियों से उनकी मांगों पर चर्चा की। सरकार की ओर से बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
मंत्री समूह और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई चर्चा
मंत्रालय में हुई बैठक में कृषि मंत्री इंदल सिंह कंसाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री कृष्णा गौर के साथ वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। किसानों की ओर से 15 से 16 प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। बैठक में मूंग खरीदी व्यवस्था, ई-टोकन सिस्टम और अन्य मांगों पर चर्चा हुई। हालांकि पहले दौर की बातचीत में किसी मुद्दे पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। दोनों पक्षों के बीच आगे भी संवाद जारी रहने की बात सामने आई है।
किसानों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी
बैठक से पहले भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र में प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। कुछ किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में अलग तरीके से विरोध जताया। प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों और युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इसके चलते रोशनपुरा चौराहे से सीएम हाउस जाने वाले मार्ग पर सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया।
शिवराज सिंह चौहान ने मूंग खरीदी पर रखा केंद्र का पक्ष
किसानों की मांगों के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर मूंग खरीदी को लेकर केंद्र की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मूंग खरीदी के लिए कोई निश्चित लक्ष्य तय नहीं किया है। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि केंद्र ने मूंग खरीदी के लिए 25 प्रतिशत तक स्वीकृति दी है। इसके बाद अतिरिक्त खरीदी की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी और राज्य अपने संसाधनों से 25 प्रतिशत से अधिक खरीदी कर सकता है।
जनता की परेशानी को देखते हुए प्रशासन ने बढ़ाई व्यवस्था
किसान आंदोलन के कारण शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। लोगों को असुविधा से बचाने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर रूट डायवर्ट किए और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। कुछ क्षेत्रों में स्कूलों के संचालन को लेकर भी प्रशासन ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया। सरकार की ओर से लगातार संवाद के जरिए समाधान निकालने की बात कही जा रही है, जबकि किसान अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।