बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में आयुष्मान भारत योजना तकनीकी दिक्कतों में उलझ गई है। पिछले 10 दिनों से जिलेभर में एक भी नया आयुष्मान कार्ड नहीं बना है। इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे गंभीर और जरूरतमंद मरीजों को इसकी वजह से परेशानी उठानी पड़ रही है। योजना से जुड़े जानकारों के मुताबिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण स्तर पर वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत डेटा को केंद्रीयकृत करने और एपीआई लिंकिंग का काम चल रहा है। इसी वजह से यह रुकावट आई है।
काउंटरों से लौट रहे मरीज
योजना के तहत जिले के कई निजी और सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड काउंटर बनाए गए हैं। यहां मरीजों को मौके पर ही कार्ड बनाकर इलाज की सुविधा मिलती थी। पिछले 10 दिनों से सर्वर ब्लॉक होने और डेटा लिंक न होने के कारण काउंटर पर पहुंचने वाले मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई मरीजों को तुरंत इलाज की जरूरत है, लेकिन कार्ड न बन पाने से उनका केस अटक गया है। कई मरीज बिना कार्ड के इलाज कराने को मजबूर हैं।
अस्पताल बिना कार्ड के इलाज से पीछे हटे
आयुष्मान भारत से इलाज करने वाले अस्पताल भी बिना कार्ड के मरीजों का इलाज करने से हिचक रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बिना बताए क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है। ऐसे में बिना कार्ड के इलाज कर भविष्य में क्लेम करने पर रकम मिलने की संभावना न के बराबर है। नतीजा यह है कि जिन मरीजों के पास कार्ड नहीं है और जिन्हें इलाज की जरूरत है, वे आयुष्मान के लाभ से वंचित होते जा रहे हैं।
क्या है तकनीकी कारण
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक राशन कार्ड डेटाबेस को केंद्रीय स्तर पर अपग्रेड और मर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी के तहत नेशनल पोर्टल पर एपीआई शिफ्टिंग का काम होने से आयुष्मान पोर्टल के साथ पुराना डेटा लिंक नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि यह तकनीकी सुधार कार्य है, जो राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है। काम पूरा होते ही सेवाएं बहाल हो जाएंगी और कार्ड बनने की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी। तब तक अस्पतालों को वैकल्पिक प्रारूप के तहत जानकारी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
15 लाख की आबादी योजना के दायरे में
जिले की कुल आबादी का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा, यानी लगभग 15 लाख लोग, आयुष्मान योजना के दायरे में आता है। अचानक आई इस रुकावट का कोई ठोस वैकल्पिक माध्यम तुरंत उपलब्ध न होने से अफरा तफरी का माहौल है। जानकारों का कहना है कि जब तक सर्वर की समस्या पूरी तरह दूर नहीं होती, आम लोगों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और संबंधित तकनीकी टीम समस्या को जल्द दूर करने की कोशिश में जुटी है।
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर सबसे ज्यादा असर
कार्ड न बन पाने का सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जिनका पहले से आयुष्मान कार्ड नहीं बना है। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें बताया जा रहा है कि कार्ड अभी नहीं बन पाएगा और आयुष्मान से इलाज अभी संभव नहीं है। अभी इलाज कराना है तो नकद देना होगा, अन्यथा कार्ड बनने तक रुकना पड़ेगा।