राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के डोंगरगढ़ बीजेपी मंडल में लंबे समय से चल रहे संगठनात्मक विवाद पर प्रदेश नेतृत्व ने सख्त कार्रवाई की है। बीजेपी ने पांच कार्यकर्ताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। वहीं, डोंगरगढ़ शहर मंडल की पूरी कार्यसमिति तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई है।
पार्टी का यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब मंडल में गुटबाजी, अनुशासनहीनता और 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे के बाद संगठन लगातार समीक्षा कर रहा था। प्रदेश संगठन ने इसे अनुशासन कायम रखने की दिशा में अहम कदम माना है।
संभागीय बैठक के बाद आया फैसला
प्रदेश महामंत्री नवीन मारकंडे ने कार्रवाई का आदेश जारी किया। इससे पहले राजनांदगांव में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की मौजूदगी में संभागीय बैठक हुई थी। बैठक के तुरंत बाद संगठन ने कार्रवाई को अंतिम रूप देते हुए आदेश जारी कर दिए।
पांच नेताओं पर 6 साल की कार्रवाई
प्रदेश संठन ने प्रिंस कक्कड़, वीरेंद्र साहू, संतोष राव, परविंदर सिंह मोंटी भाटिया और अनिल पांडे को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। संगठन के अनुसार, इन सभी को पहले भी अनुशासनहीनता के मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके थे। आंतरिक जांच में 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे के पीछे भी इन्हीं की भूमिका सामने आने की बात कही गई।
मंडल कार्यसमिति भी भंग
कार्रवाई केवल निष्कासन तक सीमित नहीं रही। मंडल अध्यक्ष जसमीत बन्नोआना के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों और संगठन में बढ़ते विवाद को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने डोंगरगढ़ शहर मंडल की पूरी कार्यसमिति भंग करने का फैसला भी लिया। संगठन का मानना है कि नई कार्यसमिति के गठने से संगठनात्मक गतिविधियों को फिर से व्यवस्थित किया जा सकेगा।
विवाद कैसे बढ़ा
डोंगरगढ़ में कुछ कार्यकर्ताओं ने संगठन के सीनियर नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी शुरू कर दी थी। इसके बाद 14 जुलाई को चार कार्यकर्ताओं को अनुशासनहीनताका नोटिस दिया गया। फिर 27 जुलाई को 111 कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा देकर मंडल अध्यक्ष पर भेदभाव सहित कई आरोप लगाए। अगले दो दिनों में 35 और इस्तीफे सामने आए। इसके बाद जिला भाजपा ने असंतुष्ट कार्यकर्ताओं से बातचीत शुरू की और पूरे मामले की रिपोर्ट प्रदेश संगठन को भेजी।
संगठन ने दिया अनुशासन का संदेश
प्रदेश संगठन की इस कार्रवाई को भाजपा के भीतर गुटबाजी और अनुशासनहीनता के खिलाफ स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। संगठन ने संकेत दिया है कि आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक करने या पार्टी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाले मामलों में भविष्य में भी इसी तरह सख्त रुख अपनाया जाएगा।