कौशल किशोर शर्मा, लखीमपुर-खीरी: सदर सीट 142 पर 2027 के चुनाव में भाजपा की लगातार तीसरी जीत और सपा की वापसी के बीच मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। भाजपा के योगेश वर्मा लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं, जबकि सपा के उत्कर्ष वर्मा 'मधुर' अब सांसद बन चुके हैं। ऐसे में सपा को नए प्रत्याशी के साथ मैदान में उतरना होगा। योगेश को दोबारा टिकट मिलने पर उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता, क्षेत्र में सक्रियता और कुर्मी समाज में पकड़ भाजपा के लिए अहम साबित हो सकती है।
घटता जीत का अंतर सपा के लिए उम्मीद
लखीमपुर सीट के इतिहास में कांग्रेस ने छह बार जीत दर्ज की, जबकि जनसंघ से भाजपा तक की राजनीतिक धारा सात बार प्रभावी रही। सपा भी चार चुनाव जीत चुकी है। 2017 में भाजपा के योगेश वर्मा ने सपा के उत्कर्ष वर्मा मधुर को 37,748 मतों से हराया था। 2022 में भाजपा फिर जीती, लेकिन अंतर घटकर 20,578 रह गया। योगेश को 1,27,663 और उत्कर्ष को 1,07,085 वोट मिले। पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा के वोट 4,986 बढ़े, जबकि सपा के मतों में 22,156 की वृद्धि हुई। इससे आगामी चुनाव में सपा की चुनौती का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कुर्मी मतों पर रहेगी नजर
योगेश और उत्कर्ष एक ही परिवार से हैं और दोनों का कुर्मी समाज में प्रभाव रहा है। पिछले चुनावों में दोनों के अलग-अलग दलों से मैदान में होने के कारण इस सामाजिक आधार के मतों का बंटवारा मुकाबले को प्रभावित करता रहा। अब उत्कर्ष के लोकसभा पहुंचने से विधानसभा चुनाव में सपा को नया चेहरा उतारना होगा। ऐसे में पार्टी के सामने अपने पुराने मतदाताओं को एकजुट रखने की चुनौती होगी। दूसरी ओर, योगेश को टिकट मिलने पर उनका व्यक्तिगत संपर्क और सामाजिक पकड़ भाजपा के पक्ष में जा सकती है। हालांकि मतदाताओं का रुख प्रत्याशियों की स्वीकार्यता और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
दोनों दलों में दावेदारों की चर्चा
भाजपा में योगेश वर्मा के अलावा आशुतोष वर्मा, पवन गुप्ता, दिव्या सिंह, डॉ. अखिलेश वर्मा, एमएलसी अनूप गुप्ता और सुनील सिंह के नाम भी चर्चा में हैं। सपा में अनुराग पटेल, मिर्जा शेखू, मोहम्मद कय्यूम, यश मोहन पटेल और मोहन बाजपेयी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। हालांकि किसी भी दल ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
स्थानीय मुद्दे भी तय करेंगे चुनावी दिशा
कुर्मी मतदाताओं के साथ ब्राह्मण, कायस्थ, अन्य पिछड़े वर्गों, दलित और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका भी अहम होगी। शहर में यातायात, अतिक्रमण, जलभराव, सड़क और पार्किंग की समस्याएं मुद्दा बन सकती हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, बिजली, कृषि लागत, फसल का उचित मूल्य और रोजगार जैसे सवाल प्रभाव डालेंगे। 2022 में बसपा को मिले 24,014 वोट भी बताते हैं कि तीसरे दलों का प्रदर्शन जीत के अंतर को प्रभावित कर सकता है। लगातार दो जीत भाजपा को बढ़त देती हैं, लेकिन घटा हुआ अंतर सपा के लिए उम्मीद जगाता है। 2027 में भाजपा की हैट्रिक और सपा की वापसी का रास्ता प्रत्याशी चयन, सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों से होकर गुजरेगा।