उमेश श्रोत्रिय चंदेरी। अशोकनगर जिले के चंदेरी में खुद को फर्जी IAS अधिकारी और मध्य प्रदेश टूरिज्म विभाग की एडिशनल डायरेक्टर बताने वाली शातिर महिला तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर इन्होंने बेरोजगारों से 9 लाख 80 हजार रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
मुख्य आरोपी तृप्ति सिंह राजपूत ने फरियादियों पर रौब जमाने के लिए खुद को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का हेड और एमपी टूरिज्म की एडिशनल डायरेक्टर बताया। नौकरी का झांसा देकर प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपये की मांग की गई थी। झांसे में आकर पीड़ितों ने चंदेरी की किला कोठी में आरोपियों को 9 लाख 80 हजार रुपये कैश और अपने असली दस्तावेज सौंप दिए। बाकी के 2 लाख रुपये बाद में देने की बात हुई थी।
भोपाल स्थित घर पर छापेमारी में आईफोन और दस्तावेज बरामद
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने दोनों भाई-बहन को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा था। जब पुलिस इन्हें लेकर भोपाल के संत आसाराम नगर, बागमुगलिया स्थित इनके घर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। ठगी के पैसों से ऐश करने वाले इन आरोपियों के पास से महंगे आईफोन की रसीदें, लग्जरी होटलों में रुकने के बिल और हवाई यात्रा के टिकट बरामद हुए हैं।
अल्कापुरी स्थित ससुराल / फर्जी ट्रॉफी और मुमेंटों
यही नहीं, जब पुलिस ने तृप्ति सिंह के अलकापुरी स्थित ससुराल में छापा मारा तो वहां से फर्जी IAS ट्रेनी अफसर बनने के जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, फर्जी गारमेंट ट्रॉफियां और मुमेंटो मिले, जिनका इस्तेमाल यह लोगों को प्रभावित करने के लिए करती थी।
भारत सरकार' लिखी कार और गिरफ्तार ड्राइवर
पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल ठगी में शामिल इनके ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी को भी अयोध्या नगर भोपाल से दबोच लिया है। वारदात में इस्तेमाल होने वाली भारत सरकार' की नेम प्लेट लगी लग्जरी कार भी पुलिस ने जब्त कर ली है। इस बड़ी कामयाबी के बाद पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2) और 61(2) के तहत केस को और मजबूत कर दिया है।
पुलिस आज इन तीनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश करने जा रही है। हालांकि, इस गैंग के दो अन्य आरोपी तनुज वैश्य और अंजली सिंह अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।