संजय श्रोत्रिय, चंदेरी। नियति कब और किस रूप में किसे कैसा जख्म दे जाए इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। ग्राम विक्रमपुर में सोमवार को एक ऐसा ही कलेजा चीर देने वाली घटना हुई।जिसने पूरे गांव को आंसुओं में डुबो दिया। एक ही झटके में एक पिता की चार संताने और एक मां की गोद हमेशा-हमेशा के लिए सूनी हो गई। खेत के पास बने एक गहरे गड्ढानुमा कुएं ने बलवीर सिंह कुशवाह के चारों मासूम बेटों—देव (9), त्रिदेव (7), महादेव (6) और प्रियांश (4)—को अपनी आगोश में लेकर उनके हंसते-खेलते संसार को पल भर में उजाड़ दिया।
मां की गैरमौजूदगी में रूठ गई जिंदगी
घटना के वक्त बच्चों की मां एक रिश्तेदारी में बिहार गई हुई थी और पिता बलवीर सुबह नौ बजे रोज की तरह मजदूरी और खेत के काम पर गए थे। चारों भाई घर पर अकेले ही खेल रहे थे। खेलते-खेलते मासूमों को क्या पता था कि घर के पास ही बना पांच फीट गहरा पानी से भरा कुआं मौत का फंदा बनकर उनका इंतजार कर रहा है। दोपहर के लगभग दो बजे जब बच्चों के ताऊ सोमसिंह वहां से गुजरे तो उनकी नजर पानी की सतह पर तैरते छोटे बच्चे प्रियांश पर पड़ी। अनहोनी की आशंका से कांपते हुए जब उन्होंने शोर मचाया और तलाश शुरू की तो उस छोटे से कुएं के भीतर देव, त्रिदेव और महादेव के भी बेजान शरीर मिले।
चीत्कारों से गूंज उठा पूरा गांव
जैसे ही बलवीर कुशवाह को इस घटना की सूचना मिली वह सीधे घटना की जगह पहुंचे। एक साथ चार बेटों की मौत की खबर सुनते ही गांव में कोहराम मच गया। हर आंख नम थी और हर दिल इस भारी दुख से बैठा जा रहा था। सूचना मिलते ही चंदेरी थाना प्रभारी प्रशांत यादव पुलिस बल के साथ और तहसीलदार दिलीप दरोगा तुरंत मौके पर पहुंचे।
प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद चारों मासूमों के शवों को चंदेरी सिविल अस्पताल लाया गया। वहां डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।