रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस में सोमवार को प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। गृह पुलिस विभाग ने राज्य पुलिस सेवा संवर्ग के सात अधिकारियों की नई पोस्टिंग का आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री सुरक्षा, राजभवन सुरक्षा, वीआईपी सुरक्षा औरमैदानी पुलिसिंग से जुड़े अफसरों को इधर से उधर किया गया है। आदेश 5 अक्टूबर को निकला है।
मुख्यमंत्री सुरक्षा में नया चेहरा
2011 बैच के अधिकारी सचिन्द्र चौबे को पीटीएस मैनपाट से हटाकरर मुख्यमंत्री सुरक्षा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। अब वे रायपुर में मुख्यमंत्री की सुरक्षा संभालने वाली टीम का हिस्सा होंगे। सीएम सुरक्षा से जुड़े इस बदलाव को अहम माना जा रहा है।
सुरक्षा इकाइयों में भी बदलाव
मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात सहायक सेनानी आलोक तिवारी को चौथी वाहिनी छसबल, माना रायपुर भेजा गया है। राजभवन सुरक्षा में तैनात गिरीश कोरी को वीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना में सहायक सेनानी बनाया गया है। इस तरह गिरीश कोरी के साथ अवस्थी की भी इसी वाहिनी में पदस्थापना हुई है।
भाटापारा में नया एसडीओपी
मैदानी पुलिसिंग में भी फेरबदल हुआ है। नवा रायपुर में एसआई मुख्यालय के उप पुलिस अधीक्षक मयंक रणसिंह को भाटापारा का एसडीओपी बनाया गया है। यानी अब उन्हें सीधे मैदानी इलाके की कमान संभालनी होगी। भाटापारा में तैनात एसडीओपी तारेश साहू को वहां से हटाकर बिलासपुर में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर भेजा गया है।
किसे कहां भेजा गया
आदेश के मुताबिक सचिन्द्र चौबे मुख्यमंत्री सुरक्षा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक होंगे। आलोक तिवारी चौथी वाहिनी माना जाएंगे। गिरीश कोरी और नीलकिशोर अवस्थी को वीआईपी सुरक्षा वाहिनी माना भेजा गया है, जबकि दिनेश सिंह राजभवन सुरक्षा में जाएंगे। मयंक रणसिंह भाटापारा एसडीओपी और तारेश साहू बिलासपुर में डीएसपी बनाए गए हैं।
सुरक्षा और मैदानी पुलिसिंग दोनों पर फोकस
इस फेरबदल में तरफ मुख्यमंत्री और राजभवन जैसी अहम सुरक्षा इकाइयों के चेहरे बदले गए हैं। दूसरी तरफ भाटापारा और बिलासपुर की मैदानी पुलिसिंग में भी बदलाव हुआ है। साफ है कि सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ जिलों में पुलिसिंग की जिम्मेदारी भी नए सिरे से तय की हैं। यह आदेश गृह पुलिस विभाग के अपर सचिव सोनचंद साहू के हस्ताक्षर से जारी हुआ है। इसमें सभी अधिकारियों को नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि इन बदलावों का सुरक्षा व्यवस्था और मैदानी पुलिसिंग पर क्या असर पड़ता है।