दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह में जिला प्रशासन ने राजस्व न्यायालयों में अनियमितताओं और सरकारी जमीन के मामलों में लापरवाही पर कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर प्रताप नारायण के निर्देश पर दमोह तहसील के 6 राजस्व न्यायालयों की जांच कराई गई। जांच में खामियां मिलीं तो तहसीलदार रॉबिन जैन और रीडर प्रियांक कोरी को निलंबित कर दिया गया।
एसडीएम सौरभ गंधर्व पर भी एक्शन लिया गया है। उनको पद से हटाकर उप जिला निर्वाचन अधिकारी बनाया गया। इसके अलावा सात अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।
अधिकार क्षेत्र से बाहर आदेश
जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किए गए। कई आवेदन पक्षकारों को सुनवाई का पर्याप्त मौका दिए बिना ही निरस्त कर दिए गए। नजूल और कीमती सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामलों में अर्थदंड वसूलने और बेदखली की कार्रवाई करने की जगह कुछ प्रकरण बिना वसूली के बंद कर दिए गए। इस पर सवाल उठे हैं। प्रशासन को आशंका है कि इससे शासन को राजस्व का नुकसान हुआ है।
रीडर की भूमिका पर भी सवाल
जांच रिपोर्ट के अनुसार अतिक्रमण के मामलो में नोटिस जारी होने के बाद उनकी तामीली पूरी नहीं कराई गई। अर्थदंड पंजी में वसूली से जुड़ी प्रविष्टियां भी नहीं मिलीं। इन्हीं गड़बड़ियों के आधार पर रीडर प्रियांक कोरी को निलंबित कर बटियागढ़ अटैच कर दिया गया।
संभागयुक्त ने दिए निलंबन के आदेश
कलेक्टर की अनुशंसा पर सागर संभागयुक्त डॉ दिलीप कुमार ने तहसीलदार रॉबिन जैन के निलंबन के आदेश जारी किए। एसडीएम सौरभ गंधर्व के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार दुबे को एसडीएम दमोह बनाया गया है। नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी को दमयंती नगर के प्रभारी तहसीलदार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब नोटिस पाने वाले अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।