दतिया। बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व गृहमंत्री के गढ़ दतिया में उपचुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गए। कांग्रेस नेता की सदस्यता रद्द होने के बाद यहां उपचुनाव हुए हैं। शाम 6 बजे तक वोटिंग पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। करीब 71 फीसदी से अधिक मतदाताओं के वोट ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
वहीं, 50000 से कम वोटर के नहीं पहुंचने पर सवाल है कि क्या दतिया के वोटरों ने खेला कर दिया है क्योंकि पिछले मुकाबले में 80.20 फीसदी मतदान हुआ था। इस बार भी बंपर वोटिंग हुई तो नरोत्तम मिश्रा की हार हुई थी। इस बार 70 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई तो बदलाव की चर्चाएं तेज है। हालांकि मतदान प्रतिशत अकेले किसी दल की जीत का संकेत नहीं माना जा सकता।
कैंडिडेट बदलने से बदला चुनावी समीकरण
इस उपचुनाव में दोनों प्रमुख दलों ने नए चेहरे उतारे हैं। बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस की तरफ घनश्याम सिंह उम्मीदवार हैं। वहीं, टिकट वितरण के बाद दोनों दलों में असंतोष की चर्चाएं भी रही। हालांकि बीजेपी ने संगठन स्तर पर डैमेज कंट्रोल किया और नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार भी किया।
छोटे दलों की भूमिका भी चर्चा में
बीजेपी-कांग्रेस के अलावा आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव ने भी चुनाव प्रचार में सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई। उनके समर्थन में पार्टी नेतृत्व भी दतिया पहुंचा। राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि तीसरे मोर्चे को उल्लेखनीय वोट मिलते हैं तो इसका असर मुख्य मुकाबले पर पड़ सकता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब मतगणना पर टिकी सभी की निगाहें
बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपनी जीत का दावा किया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर कुछ शिकायतें उठाई हैं। वहीं, बीजेपी ने इसका खंडन भी किया है। स्थानीय स्तर पर मुकाबले को बेहद करीबी माना जा रहा है। अब 3 अगस्त को मतगणना के साथ ही यह साफ होगा कि दतिया विधानसभा में जनता ने किस पर अपना भरोसा जताया है और नया विधायक कौन बनेगा।