Rahul Gandhi Acquitted

Rahul Gandhi Acquitted: आठ साल की कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप, साक्ष्य के अभाव में राहुल गांधी बरी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि के मामले में कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुल्तानपुर की अदालत ने साक्ष्य के...

By : विकास जैन
Rahul Gandhi Acquitted: आठ साल की कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप, साक्ष्य के अभाव में राहुल गांधी बरी

Rahul Gandhi Acquitted: आठ साल की कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप, साक्ष्य के अभाव में राहुल गांधी बरी

संतोष यादव, सुल्तानपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि के मामले में कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुल्तानपुर की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। करीब आठ साल पहले शुरू हुए इस प्रकरण का सोमवार को आए फैसले के साथ पटाक्षेप हो गया। राजनीतिक बयान से शुरू हुआ यह मामला परिवाद, वारंट, अदालत में पेशी, गवाही, आवाज के नमूने के मिलान की मांग और निचली अदालत से हाईकोर्ट तक चली कानूनी प्रक्रिया का गवाह बना। इस दौरान राहुल गांधी को कई बार अमेठी-सुल्तानपुर के दौरे के बीच अदालत में पेश होने के लिए भी आना पड़ा। फैसले ने इस लंबे मुकदमे के एक अहम अध्याय पर विराम लगा दिया।

बयान से अदालत तक पहुंचा मामला

मामले की शुरुआत आठ मई 2018 को उस कथित टिप्पणी से हुई, जिसे लेकर भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का परिवाद दाखिल किया। चार अगस्त 2018 को अदालत में परिवाद दायर होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ा। 27 नवंबर 2023 को अदालत ने राहुल गांधी को तलब करते हुए वारंट जारी किया। इसके बाद 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी सुल्तानपुर पहुंचे और अदालत में समर्पण किया। उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

पेशी, बयान और गवाहियों से आगे बढ़ी सुनवाई

20 फरवरी 2024 की पेशी के बाद मुकदमे की सुनवाई अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ती रही। 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी का बयान दर्ज किया गया। नौ अक्टूबर 2024 को परिवादी विजय मिश्र की गवाही हुई। इसके बाद 28 फरवरी 2025 को गवाह अनिल मिश्र और आठ दिसंबर 2025 को रामचंद्र दुबे की गवाही दर्ज की गई। 20 फरवरी 2026 को अदालत ने राहुल गांधी का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किया। इस चरण में अदालत ने आरोपी का पक्ष सुनते हुए साक्ष्यों और आरोपों के संबंध में उनका जवाब दर्ज किया।

आवाज के नमूने के मुद्दे पर निचली अदालत से हाईकोर्ट तक लड़ाई

मुकदमे में आवाज के नमूने का मिलान कराने की मांग भी अहम कानूनी मुद्दा बनी। 12 मार्च 2026 को इस संबंध में अदालत में अर्जी दाखिल की गई। दो मई को मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने इसे खारिज कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए 21 मई को सेशन कोर्ट में निगरानी अर्जी दाखिल की गई, जिसे 15 जुलाई को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। दस सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने आवाज के नमूने के मिलान से संबंधित निगरानी अर्जी खारिज कर दी। इस तरह आवाज के नमूने के मिलान का मुद्दा निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा, लेकिन राहुल गांधी को इस प्रक्रिया में राहत नहीं मिली।

बहस पूरी होने के बाद फैसले पर टिकी निगाहें

छह अक्टूबर 2026 को परिवाद पर अंतिम बहस शुरू हुई। 12 अक्टूबर को भी बहस हुई और इसी दिन सुनवाई पूरी हो गई। इसके बाद 26 अक्टूबर को फैसले की तारीख निर्धारित हुई। सोमवार को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में राहुल गांधी को बरी कर दिया। इस फैसले के साथ वर्ष 2018 में शुरू हुआ मुकदमा अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गया।

राजनीतिक आरोप से न्यायिक निष्कर्ष तक

यह प्रकरण केवल एक राजनीतिक बयान को लेकर शुरू हुई कानूनी लड़ाई नहीं रहा, बल्कि इसमें आरोपी की पेशी से लेकर गवाहियों, बयान, आवाज के नमूने के मिलान की मांग और विभिन्न न्यायिक स्तरों पर चुनौती देने की प्रक्रिया शामिल रही। करीब आठ वर्षों तक चले इस मामले में अदालत के सामने आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण हुआ। अंततः साक्ष्य के अभाव में आया फैसला इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष बनकर सामने आया।