Gwalior Fake Passport Case: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ग्वालियर फर्जी पासपोर्ट मामले की आंच अब भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र और पुलिस महकमे तक पहुंच गई है। एसटीएफ की कस्टडी में मौजूद मुख्य एजेंट नसीम अख्तर से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि 2022 में भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों और स्थानीय पुलिस कर्मियों की कथित सांठगांठ से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाए जा रहे थे।
थाना प्रभारी व आरक्षक पर गिरेगी गाज
मामले में एसटीएफ के डीआईजी ने ग्वालियर पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। पत्र में तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और पुलिसकर्मी भूपेंद्र गुर्जर की भूमिका की जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। एसटीएफ के अनुसार, पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट सेवा केंद्र की प्रक्रिया के दौरान अधूरे और संदिग्ध दस्तावेजों के बावजूद फाइलों को सांठगांठ कर आगे बढ़ा दिया गया था।
एक ही पते से जारी 17 फर्जी पासपोर्ट
जांच एजेंसी को पता चला है कि डबरा स्थित एक बौद्ध विहार के एक ही पते और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके 17 संदिग्ध पासपोर्ट तैयार कराए गए थे। मामले में संदिग्ध रेयाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु से जुड़े बैंक खातों का ब्योरा खंगाला जा रहा है। एसटीएफ यह पता लगा रही है कि फर्जी पासपोर्ट रैकेट के पीछे कितना बड़ा आर्थिक लेनदेन हुआ है। अब मठों व बौद्ध विहार में आने-जाने वाले लोगों और पुराने रिकॉर्ड्स का डेटा भी जुटाया जा रहा है।
कौन है मास्टरमाइंड नसीम?
बता दें कि रिमांड पर चल रहे आरोपी नसीम अख्तर ने बताया कि वह भोपाल के एमपी नगर में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता था। कम आमदनी होने के कारण उसने फर्जी पासपोर्ट बनाने का अवैध धंधा शुरू किया और धीरे-धीरे अधिकारियों व दलालों का बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया।
कई जिलों में STF की छापेमारी
एसटीएफ की टीमें इस नेटवर्क की जड़ें खंगालने के लिए ग्वालियर, भोपाल, बैतूल समेत मध्य प्रदेश के कई जिलों में लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही हैं।