Hapur Farmers

Hapur Farmers: प्राधिकरणों पर किसानों का डेरा, हापुड़ से भी गरजी किसान महापंचायत

किसानों की लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान को लेकर नोएडा में चल रही किसान महापंचायत मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही।

By : विकास जैन
Hapur Farmers: प्राधिकरणों पर किसानों का डेरा, हापुड़ से भी गरजी किसान महापंचायत

Hapur Farmers: प्राधिकरणों पर किसानों का डेरा, हापुड़ से भी गरजी किसान महापंचायत

प्रमोद शर्मा, हापुड़/नोएडा: किसानों की लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान को लेकर नोएडा में चल रही किसान महापंचायत मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। बड़ी संख्या में किसानों ने तीनों प्राधिकरण कार्यालयों पर डेरा डालते हुए शांतिपूर्ण धरना दिया। किसानों ने दो टूक कहा कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

महापंचायत में हापुड़ से भी भारी संख्या में किसानों ने पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। एनसीआर अध्यक्ष (युवा) उत्तर प्रदेश एकलव्य सिंह सहारा के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने किसानों की जमीनों के अधिग्रहण और मुआवजे के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। सहारा ने कहा कि हापुड़ क्षेत्र में रेलवे समेत विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है। कई गांवों की जमीन अधिग्रहण की जद में है, लेकिन इन गांवों के सर्किल रेट वर्षों से नहीं बढ़ाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों की ओर से यह दावा किया जाता है कि किसानों को जमीन के बदले चार गुना मुआवजा दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। लंबे समय से सर्किल रेट में बढ़ोतरी नहीं होने के कारण चार गुना मुआवजा मिलने के बावजूद कई मामलों में अधिग्रहित जमीन का मूल्य मौजूदा बाजार भाव से काफी कम रह जाता है। ऐसे में किसान अपनी जमीन की वास्तविक कीमत से वंचित हो रहे हैं।

एकलव्य सिंह सहारा ने कहा कि किसानों को उनकी जमीन का न्यायपूर्ण और वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल कागजों में चार गुना मुआवजे की बात करने से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीन की वास्तविक कीमत को ध्यान में रखना जरूरी है।

उधर, गौतमबुद्ध नगर के किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से ज्ञापन और वार्ता के माध्यम से प्राधिकरण अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखते आ रहे हैं, लेकिन कई मांगें अब भी लंबित हैं। किसानों ने स्पष्ट किया कि इस बार आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और ठोस कार्रवाई चाहिए। 

किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन किसी एक गांव या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह किसान, मजदूर और नौजवानों के अधिकारों की लड़ाई है। धरनास्थल पर किसानों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है। इस दौरान हापुड़ से विनय बाना, इंद्रपाल सिंह, शेखर चौधरी, वकील मलिक, अहमद अली, मनिंदर मसंद, भवेंद्र सिसोदिया, ममता शर्मा, डॉ. मतलूब समेत बड़ी संख्या में किसान और संगठन के साथी मौजूद रहे।