प्रमोद शर्मा, हापुड़/पिलखुवा: पिलखुवा के बाजार में उस समय नजारा बदल गया, जब महिला पुलिसकर्मियों के साथ स्कूली छात्र-छात्राओं का काफिला हाथों में जागरूकता की तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरा। “हम सुरक्षित हैं, हम सशक्त हैं” जैसे नारों से बाजार गूंज उठा। उत्तर प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति फेज-6.0 अभियान के तहत राजपूताना इंटर कॉलेज से चंडी मंदिर तक निकाली गई जागरूकता रैली में बेटियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम को सीओ पिलखुवा मुनीष चंद्र के नेतृत्व में धरातल पर उतारा गया। रैली में केएमएस पब्लिक स्कूल, वीआईपी पब्लिक स्कूल और केशव मारवाड़ डिग्री कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। महिला पुलिसकर्मियों ने भी पूरे जोश के साथ रैली में हिस्सा लेकर छात्राओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। रैली का नेतृत्व कोतवाली प्रभारी मनोज बालियान के निर्देशन में मिशन शक्ति प्रभारी उपनिरीक्षक रेखा भदौरिया ने किया। महिला आरक्षी निशी, साक्षी, बॉबी, प्राची चौहान, सोनिया, हेमलता, रेनू और मछला सहित पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
सड़क पर लगी सुरक्षा की पाठशाला
चंडी मंदिर मार्ग पर पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने छात्राओं से सीधे संवाद किया। किसी औपचारिक मंच के बजाय सड़क पर ही सुरक्षा को लेकर सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हुआ। छात्राओं को महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और आपात स्थिति में पुलिस की मदद लेने के तरीके बताए गए।
उपनिरीक्षक रेखा भदौरिया ने छात्राओं को 1090 वूमेन पावर लाइन, 112 आपात सेवा और 1930 साइबर हेल्पलाइन की जानकारी दी। इसके अलावा 181, 102, 108, 101 और 1076 जैसे महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर भी मोबाइल में सेव रखने की अपील की गई। कई छात्राओं ने मौके पर ही नंबर अपने मोबाइल में सेव किए।
“थाना डर की नहीं, भरोसे की जगह”
कार्यक्रम के समापन पर प्रभारी निरीक्षक मनोज बालियान ने छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वर्दी से डरने की जरूरत नहीं है। थाना डर की नहीं, भरोसे की जगह है। उन्होंने कहा कि किसी भी परेशानी में छात्राएं बेझिझक पुलिस से संपर्क करें। पुलिस की महिला आरक्षी उनकी बड़ी बहनों की तरह हर संभव मदद के लिए मौजूद हैं। मिशन शक्ति की यह रैली सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छात्राओं को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी जानकारी देने और पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ाने का संदेश भी दे गई। पुलिस और समाज के इस साझा प्रयास ने साफ कर दिया कि बेटियां चुप नहीं रहेंगी, जागरूक होंगी और जरूरत पड़ने पर अपनी आवाज बुलंद करेंगी।