राजेश जायसवाल, महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा से सटे सोनौली में बस डिपो के आसपास कथित अवैध डग्गामार बसों के संचालन और पार्किंग का मामला एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय लोगों के अनुसार मुख्य मार्ग के किनारे बनाए गए पार्किंग स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में बसें खड़ी होती हैं और नेपाल से आने वाले यात्रियों को बैठाकर दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, मुंबई, हैदराबाद सहित अन्य शहरों के लिए रवाना किया जाता है।
खास बात यह है कि जिस स्थान पर इन बसों की पार्किंग होने की बात कही जा रही है, वहीं सोनौली पुलिस की पिकेट भी मौजूद रहती है। ऐसे में पुलिस की निगरानी के बीच बसों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि सवारी भरने के बाद सोनौली कोतवाली का कारखास एक सिपाही कई बार बसों को पार्किंग स्थल से निकलवाते हुए दिखाई देता है। इस सिपाही को लेकर सीमावर्ती क्षेत्र में चर्चाएं भी होती रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बसों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है। यदि मुख्य मार्ग पर बिना वैध अनुमति अथवा निर्धारित नियमों के बसों का संचालन और पार्किंग हो रही है तो इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि एआरटीओ विभाग की ओर से कभी-कभार एक-दो बसों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बावजूद कथित अवैध संचालन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। इससे नियमित परिवहन व्यवस्था और राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब सवाल यह है कि पुलिस पिकेट के सामने यदि लंबे समय से बसों की अवैध पार्किंग और सवारियां भरने का सिलसिला चल रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही है? क्या इन बसों के पास वैध परमिट, फिटनेस, बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेज हैं? यदि नहीं, तो इनके संचालन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
स्थानीय लोगों ने पुलिस और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सोनौली बस डिपो क्षेत्र में संचालित बसों की परमिट, फिटनेस, बीमा और अन्य कागजात की जांच कराने तथा मुख्य मार्ग पर हो रही कथित अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक संबंधित पुलिस एवं परिवहन विभाग के अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।