रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के 13 साल बाद मामले की जांच को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। झीरम हमले के मास्टरमाइंड बताए गए तिमरी तिरूपति उर्फ देवजी और प्रमुख कमांडर बारसे सुक्का उर्फ देवा NIA की वांछित सूची में रहे हैं। इसके बावजूद अदालत में चले मुकदमें में दोनों आरोपी शामिल नहीं थे।
11 माओवादियों के खिलाफ चला मुकदमा
झीरम कांड में कुल 11 आरोपित माओवादियों के खिलाफ ट्रायल चला। इनमेंसे एक आरोपित की मौत हो चुकी है। जगदलपुर की एनआईए विसेष अदालत ने हाल ही में 11 आरोपितों को दोषी करार दिया है। हालांकि हमले में महत्वपूर्ण भूमिका वाले माने जाने वाले देवजी और देवा जैसे बड़े माओवादी नेतओ के खिलाफ इस मामले में मुकदमा नहीं चला। यही बात अब जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है।
सरेंडर के बाद भी नहीं हुई पूछताछ
मामले का अहम पहलू यह है कि देवजी और देवा समेत कुछ ऐसे वांछित माओवादी बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। झीरम हमले की जांच के दौरान उनके नाम सामने आते रहे थे। सके बावजूद झीरम मामले में उनसे पूछताछ नहीं की गई है। एक्सपर्ट के अनुसार, आत्मसमर्पण कर चुके इन लोगों से पूछताछ होती तो हमले की साजिश और उससे जुड़े पहलुओं की जांच को महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती थी।
कांग्रेस ने एनआईए जांच पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने इसे एनआईए की जांच की बड़ी कमी बताया है। पार्टी ने मामले को लेकर हाई कोर्ट जाने के संकेत भी दिए हैं। कांग्रेस का कहना है कि झीरम घाटी हमले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए जांच के सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
एनआईए विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, गृहमंत्री ननकी राम कुंवर, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी और समर्पित माओवादियों का नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि झीरम घाटी हमला केव माओवादी हमला नहीं, बल्कि राजनीतिक षड्यंत्र और हत्या थी। उनका कहना है कि तत्कालीन सीएम, गृहमंत्री और संबंधित अधिकारियों का नार्को टेस्ट होने पर घटना का पूरा सच साने आ सकता है। इसके चलते कांग्रेस नार्को टेस्ट की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
जांच को मिल सकती है नई दिशा
एक्सपर्ट का कहना है कि आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव नहीं होने की स्थिति में भी जांच एजेंसी उनसे पूछताछ कर सकती थी। ऐसे लोगों से पूछताछ से झीरम हमले के पीछे की पूरी कड़ी समझने और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की पड़ताल में मदद मिल सकती थी। अब इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।