Kalyan Singh Death Anniversary Special

Kalyan Singh Death Anniversary: रामनगरी की रज में रम चुका है 'रामभक्त' कल्याण का कालजयी कथन

राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का नाम गहरे जुड़ा रहा है। भाजपा नेता के रूप में उन्होंने आंदोलन को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

By : विकास जैन
Kalyan Singh Death Anniversary: रामनगरी की रज में रम चुका है 'रामभक्त' कल्याण का कालजयी कथन

Kalyan Singh Death Anniversary: रामनगरी की रज में रम चुका है 'रामभक्त' कल्याण का कालजयी कथन

सुधाकर पाण्डेय, अयोध्या: राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का नाम गहरे जुड़ा रहा है। भाजपा नेता के रूप में उन्होंने आंदोलन को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। कारसेवकों पर गोली न चलाने का फैसला सबसे चर्चित घटनाओं में है। उनका अयोध्या से राजनैतिक नहीं, भावनात्मक जुड़ाव भी था। राममंदिर आंदोलन के दौरान उनका संपर्क विहिप, साधु-संतों और प्रमुख नेताओं से रहा। अशोक सिंघल, रामचंद्र परमहंस, जगद्गुरु विद्या भास्कर, महंत अवेद्यनाथ और साधु-संतों की टोली के साथ उनका निकट संवाद रहा। भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेताओं के साथ भी उन्होंने आंदोलन के दौर में अहम भूमिका निभाई।

चहेते नेताओं में अयोध्या की आवाज कल्याण सिंह की राजनीतिक शैली में अयोध्या और राम मंदिर का मुद्दा प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासन और सरकार के स्तर पर ऐसा रुख अपनाया। इसने राम मंदिर आंदोलन के समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ाई। भाजपा के भीतर भी उन्हें हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन के मजबूत चेहरों में गिना जाने लगा। कल्याण सिंह का अयोध्या से रिश्ता यहीं समाप्त नहीं हुआ। बाद के वर्षों में भी राम मंदिर निर्माण को लेकर उनका रुख स्पष्ट रहा। राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के बाद भी उन्होंने इसे अपने राजनीतिक संघर्ष की परिणति के रूप में देखा।

राममंदिर आंदोलन में कल्याण सिंह की भूमिका को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है कि उन्होंने आंदोलन के निर्णायक दौर में सत्ता का नेतृत्व किया। अयोध्या में कारसेवकों पर बल उपयोग से इनकार का फैसला लिया। यही फैसला उन्हें अयोध्या और राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में एक अलग पहचान देता है।

6 दिसंबर 1992 और कल्याण सिंह

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के दौरान कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कारसेवकों पर गोली नहीं चलाऊंगा, नहीं चलाऊगा, नहीं चलाऊंगा यह बातें अयोध्या के साधु संतों के बीच उनके और कारसेवकों पर गहरी छाप छोड़ गई। ढांचा गिराए जाने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यही घटना उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान बन गई।