प्रमोद शर्मा, हापुड़/धौलाना: धौलाना तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कानूनगो बिजेंद्र सिंह को कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। कानूनगो की गिरफ्तारी से तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। टीम आरोपी को हिरासत में लेकर धौलाना थाने पहुंची, जहां पूछताछ के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
मामला ग्राम शौलाना में जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता डॉ. के.पी. सिंह के अनुसार जमीन की वैध रजिस्ट्री उनके नाम है। उनके पास अपडेटेड फर्द और दाखिल-खारिज के दस्तावेज भी हैं तथा मौके पर जमीन पर उनका कब्जा है। आरोप है कि इसके बावजूद धौलाना तहसील में तैनात कानूनगो बिजेंद्र सिंह उनकी जमीन में किसी दूसरे व्यक्ति का हिस्सा बताते हुए दबाव बना रहे थे।
डॉ. सिंह का आरोप है कि उन्होंने कानूनगो को जमीन से संबंधित मूल दस्तावेज दिखाने की कई बार कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उनके कागजात देखने से इनकार कर दिया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, जमीन से जुड़े काम को लेकर कानूनगो ने कथित रूप से डेढ़ लाख रुपये की मांग की। बार-बार मांग किए जाने से परेशान होकर डॉ. सिंह ने मामले की शिकायत मेरठ एंटी करप्शन ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने आरोपों का सत्यापन कराया। इसके बाद टीम ने जाल बिछाया और रिश्वत की पहली किश्त देने की योजना बनाई गई। तय योजना के मुताबिक कानूनगो बिजेंद्र सिंह 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेने के लिए डॉ. के.पी. सिंह के क्लीनिक पर पहुंचे। जैसे ही रिश्वत की रकम ली गई, एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें कथित तौर पर नोटों समेत गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई के बाद टीम आरोपी कानूनगो को धौलाना थाने लेकर पहुंची। वहां पूछताछ और मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच टीम यह भी खंगाल रही है कि जमीन के मामले में रिश्वत की मांग किन परिस्थितियों में की गई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। कानूनगो की गिरफ्तारी ने धौलाना तहसील की कार्यप्रणाली और राजस्व मामलों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पूरे प्रकरण में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।