श्रीनिवास त्रिपाठी, सूरतगंज: सरयू की उफनाती धारा के बीच बाढ़ से जूझ रहे गांवों में मंगलवार को राहत की उम्मीद लेकर प्रशासनिक अमला पहुंचा। प्रभारी एवं कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के साथ दोपहर करीब 12 :30 बजे बतनेरा स्थित बाढ़ राहत केंद्र पहुंचे। यहां सुंदरनगर, कोडरी और ललपुरवा के 341 बाढ़ पीड़ितों को राशन किट वितरित की गई। राहत सामग्री हाथ में आते ही पीड़ितों ने सिर्फ धन्यवाद नहीं दिया, बल्कि वर्षों से बाढ़ का दंश झेल रहे अपने गांवों का दर्द भी मंत्री के सामने रख दिया।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि हर साल सरयू का पानी उनकी जिंदगी को उजाड़ देता है। सुंदरनगर के कुंवारे, यूनुस, रज्जब, संजीव, संजय तिवारी समेत अन्य ग्रामीणों ने कहा कि तटबंध के बाहर जमीन उपलब्ध कराकर गांव को सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए। ग्रामीणों ने खेती योग्य जमीन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
मंत्री सुरेश राही के कड़े आदेश
ग्रामीणों की पीड़ा सुनने के बाद मंत्री सुरेश राही ने एसडीएम अकांक्षा गुप्ता को सुंदरनगर गांव के लिए तटबंध के बाहर जमीन चिह्नित कर ग्रामीणों को शिफ्ट करने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। वहीं ग्रामीण गुरुदीन ने सरयू नदी पर पुल निर्माण की मांग उठाई। मंत्री ने कहा कि पुल निर्माण के लिए प्रयास जारी हैं। मंत्री के दौरे के समय उनके साथ पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय, जिला पूर्ति अधिकारी राकेश तिवारी, सीओ फतेहपुर जगतराम कनौजिया, तहसीलदार विपुल सिंह, बीडीओ देवेंद्र प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार तहजीब हैदर, सप्लाई इंस्पेक्टर अनुज कुमार, एसएचओ अमित सिंह भदौरिया, सचिव विभा गुप्ता समेत अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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20 किलो की बोरी में मिला सिर्फ 8 किलो भूसा
राहत केंद्र से निकलने के बाद मंत्री सुंदरनगर तटबंध पर पहुंचे और बाढ़ प्रभावित पशुओं के लिए उपलब्ध कराए जा रहे भूसे की जानकारी ली। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीआर पाटिल ने बताया कि 40 कुंतल भूसा आया है और 20 किलो की बोरी के हिसाब से प्रति परिवार भूसा वितरित किया जा रहा है। अब तक 95 लोगों को भूसा दिए जाने की जानकारी भी दी गई।
जब मंत्री का चढ़ा पारा
लेकिन जब मंत्री ने मौके पर भूसे की एक बोरी का वजन कराया तो मामला उलट गया। बोरी में करीब आठ किलो भूसा ही मिला। यानी जिस बोरी में 20 किलो भूसा होना चाहिए था, उसमें आधे से भी कम मात्रा देखकर मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने पशु चिकित्साधिकारी को फटकार लगाते हुए साफ शब्दों में कहा “बेजुबानों का न खाइए।” मंत्री के इस तेवर से मौके पर मौजूद अधिकारियों में खलबली मच गई। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में पशुओं की संख्या के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में भूसा उपलब्ध कराया जाए और वितरण व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
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कटान देखकर बढ़ी चिंता, 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश
इसके बाद मंत्री हेतमापुर में सरयू नदी के किनारे पहुंचे और कटान की स्थिति का जायजा लिया। नदी की धार और कटान से पैदा हुए खतरे को देखते हुए उन्होंने अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली।उन्होंने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ पीड़ितों को किसी भी स्थिति में परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित गांवों में प्रशासनिक टीमें लगातार निगरानी रखें और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जाए।सरयू की लहरों के बीच खड़े बाढ़ पीड़ितों की आंखों में घर-खेत बचाने की चिंता साफ दिखाई दे रही थी। किसी को गांव के उजड़ने का डर है तो किसी को पशुओं के चारे की चिंता। ऐसे में राहत किट से कुछ समय की मदद जरूर मिली, लेकिन ग्रामीणों की सबसे बड़ी उम्मीद अब स्थायी समाधान पर टिकी है।
बाढ़ का दर्द...
सुंदरनगर के ग्रामीणों ने मंत्री के सामने सिर्फ राहत सामग्री की मांग नहीं रखी, बल्कि स्थायी पुनर्वास की गुहार लगाई। ग्रामीणों का कहना था कि तटबंध के बाहर सुरक्षित जमीन मिल जाए तो वे बार-बार आने वाली बाढ़ और कटान से बच सकते हैं। खेती योग्य जमीन उपलब्ध कराने की मांग भी इसी दर्द का हिस्सा थी। ग्रामीणों की मांग पर मंत्री ने जमीन चिह्नित कर गांव को सुरक्षित स्थान पर बसाने की कार्रवाई के निर्देश दिए।