भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने की तैयारी में है। खर्चों पर नियंत्रण और बजटीय अनुशासन मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने 74 बजटीय मदों को समाप्त करने का फैसला लिया है। इस फैसले का असर मंत्रियों और विधायकों को मिलने वाली काई पारंपरिक सुविधाओं और भत्तों पर भी पड़ेगा।
दरअसल, सरकार का मानना है कि समय के साथ कई बजटीय प्रावधान अप्रासंगिक हो चुके हैं। इन्हें खत्म करने से सरकारी खर्चों में कमी आएगी। साथ ही साधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
15 मद सीधे मंत्रियों और विधायकों से जुड़े
बता दे कि मध्य प्रदेश के बजट से हटाई जा रही 74 मदों में से 15 प्रावधान ऐसे शामिल हैं जो सीधे तौर पर मंत्रियों और विधायकों के व्यक्तिगत के साथ प्रशासनिक खर्चों से जुड़े हैं। नए नियम लागू होने के बाद मदों के तहत मिलने वाले कई भत्ते और सुविधाएं समाप्त हो जाएंगी।
इन भत्तों पर लगेगी रोक
सरकार जिन प्रावधानों को समाप्त करने की तैयारी में हैं। उनमें हेयर कटिंग (बाल कटवाने) और कपड़ों की धुलाई से जु़डे़ भत्ते शामिल हैं। इसके अलावा भोजन और अनाज अग्रिम भत्ता, त्योहार अग्रिम भत्ता, अवकाश यात्रा शामिल हैं। इसके अलावा प्रतिनिधित्व से जुड़े कुछ पुराने प्रावधान हटाए जाएंगे। सरकार का तर्क है कि इन मदों की अब व्यावहारिक उपयोगिता कम हो चुकी है और इन पर होने वाले खर्च घटाने की जरूरत है।
बजटीय अनुशासन पर रहेगा फोकस
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य केवल खर्च कम करना नहीं बल्कि वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना भी है। अनावश्यक मदों को समाप्त करने से बजट को जरूरत के क्षेत्रों पर अधिक केंद्रित किया जा सकेगा। इसके अलावा सरकारी धन का बेहतर उपयोग संभव होगा।
बजटीय व्यवस्था में बदलाव माना जा रहा फैसला
आगामी वित्तीय वर्ष में बजट में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश की बजटीय व्यवस्था के बड़े सुधारों में शामिल माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि पुराने और कम उपयोग वाले प्रावधान हटने से वित्तीय प्रबंध मजबूत होगा और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में अधिक जवाबदेही आएगी। अब इस प्रस्ताव को आगामी बजट में किस रूप में लागू किया जाता है इस पर सबकी निगाहें रहने वाली हैं।