योगेंद्र त्रिपाठी, तुलसीपुर (बलरामपुर): राज्य अनुदानित मदरसा दारुल उलूम अतीकिया में हुए करोड़ों के वेतन व बोनस घोटाले के आरोप लगने के बाद विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभिन्न जांच टीमों द्वारा भौतिक व अभिलेखीय सत्यापन किए जाने और प्रधानाचार्य द्वारा स्वयं गड़बड़ी स्वीकार किए जाने के बावजूद अब तक जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। जांच में बरती जा रही इस शिथिलता और केवल वसूली तक कार्रवाई को सीमित रखने के प्रयासों को लेकर शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से तत्काल एफआईआर दर्ज कराने की गुहार लगाई है।
सामने आई थी हेराफेरी
बता दें कि मदरसे में वर्ष 2015 और 2016 में नियुक्त शिक्षकों के मूल वेतन को नियम विरुद्ध एक समान रखने, एक ही वित्तीय वर्ष में दो बार दीपावली बोनस आहरित करने और गैर-संस्था के लिपिक अज़ीज़ अहमद अंसारी द्वारा अभिलेख तैयार कर वित्तीय हेराफेरी किए जाने का मामला आरोप लगा था। इस प्रकरण में जुलाई माह में जिला लेखा परीक्षा अधिकारी और अगस्त माह में वित्त एवं लेखाधिकारी (माध्यमिक) द्वारा भौतिक व अभिलेखीय परीक्षण भी किया जा चुका है। इसके अलावा कोषागार के लूजशीट और विभागीय अभिलेखों में वित्तीय अनियमितता पहले ही प्रमाणित हो चुकी है। इसके बावजूद विभाग द्वारा मामले में मुकदमा दर्ज कराने के बजाय जांच के नाम पर हीलाहवाली की जा रही है।
शिकायतकर्ता के आरोप
शिकायतकर्ता अब्दुर्रहीम ने जिलाधिकारी को एक बार फिर प्रार्थना पत्र देते हुए कहा कि जब कोषागार अभिलेख, लूजशीट और खुद प्रधानाचार्य का बयान वित्तीय धांधली को स्पष्ट कर रहे हैं, तब सिर्फ रिकवरी का हवाला देकर दोषियों को बचाना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय शिथिलता के कारण दोषियों के हौसले बुलंद हैं, इसलिए बिना किसी देरी के प्रबंधक, प्रधानाचार्य मुजफ्फर हुसैन और संलिप्त लिपिकों के खिलाफ गबन की धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए और संबंधित से सरकारी धन की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।
क्या कहते है अधिकारी?
वहीं, मामले पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी यशवंत मौर्य ने बताया कि जिलाधिकारी डॉ विपिन कुमार जैन के निर्देश पर एक दो सदस्य टीम का गठन किया गया है, जिसमें लेखा अधिकारी बेसिक शिक्षा विभाग व मुझे समिति का सदस्य बनाया गया है। हम पूरे मामले की तहकीकात करेंगे। उन्होंने बताया कि मदरसे से जुड़े अभिलेखों, सेवा पुस्तिकाओं, मदरसे द्वारा संस्थान का कारवाया गया ऑडिट और कोषागार से जारी भुगतानों का तकनीकी परीक्षण कराया जा रहा है। जांच प्रक्रिया पूरी होते ही रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध विधिक व विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, किसी भी स्तर पर गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।