प्रमोद शर्मा, हापुड़: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर हापुड़ के पत्रकारों में आक्रोश दिखाई दिया। हरियाणा में बढ़ती नशाखोरी के मुद्दे पर समाचार प्रसारित किए जाने के बाद लिविंग इंडिया और हिंदी खबर न्यूज चैनल के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल समेत चार लोगों को हिरासत में लिए जाने के प्रकरण को लेकर पत्रकारों ने गंभीर चिंता जताई। पत्रकारों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग उठाई।
ज्ञापन में कहा गया कि हिरासत में लिए गए लोगों में एक महिला पत्रकार भी शामिल हैं। पत्रकारों के अनुसार इस घटनाक्रम ने मीडिया जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। उनका कहना है कि यदि किसी समाचार अथवा रिपोर्ट को लेकर कोई कानूनी आपत्ति है तो उसका निस्तारण कानून के निर्धारित प्रावधानों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। पत्रकारिता करने के कारण किसी पत्रकार को डराने, दबाव में लेने या प्रताड़ित करने की स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।
पत्रकारों ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) का हवाला देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियादी ताकत है। स्वतंत्र पत्रकारिता समाज की समस्याओं को सामने लाने और शासन-प्रशासन का ध्यान जनहित के मुद्दों की ओर आकर्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। नशाखोरी जैसी गंभीर सामाजिक समस्या को उजागर करना पत्रकारिता के जनहितकारी दायित्वों में शामिल है।
ज्ञापन में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई। साथ ही यह भी जांच करने का आग्रह किया गया कि कहीं हिरासत की कार्रवाई नशाखोरी से संबंधित प्रसारित समाचार के कारण तो नहीं की गई। यदि जांच में कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण या नियमविरुद्ध पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई।
पत्रकारों ने राष्ट्रपति से देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को डराने-धमकाने अथवा प्रताड़ित करने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगनी चाहिए। पत्रकारों ने राष्ट्रपति से मामले का गंभीरता से संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच, पत्रकारों की सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देने का आग्रह किया। इस दौरान पत्रकारों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जनहित के मुद्दों को उठाने वाली स्वतंत्र आवाज को दबाने के बजाय कानून के दायरे में निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई होनी चाहिए।