योगेंद्र त्रिपाठी, पचपेड़वा (बलरामपुर): कागजों पर नाली बन गई, सड़कें दुरुस्त हो गईं और ह्यूम पाइप भी बिछ गए, लेकिन धरातल पर विकास की जगह केवल भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा कर दिया गया। बलरामपुर जिले के पचपेड़वा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भगवानपुर शिवपुर में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और सचिव की मिलीभगत से बिना कोई ठोस काम कराए लाखों रुपए का फर्जी भुगतान निकाल लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास अधिकारी मोहित दुबे ने त्रिस्तरीय जांच टीम का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
गांव में वित्तीय अनियमितता का आलम यह है कि नाली मरम्मत के नाम पर 5,29,520 रुपए का आहरण कर लिया गया, जबकि मौके पर मरम्मत का कोई नामोनिशान नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार मात्र 20-30 मीटर नाली में एक रद्दा ईंट जोड़कर बिना मेजरमेंट बुक यानी एमबी के ही पूरी धनराशि हड़प ली गई। इसी तरह 2 मार्च 2026 को सीसी रोड के नाम पर 1,48,366 रुपए और ह्यूम पाइप के नाम पर 1,93,750 रुपए की सरकारी धनराशि खारिज की गई। नियमों के तहत बिना स्थलीय जांच और मेजरमेंट बुक दर्ज किए किसी भी वित्त आयोग के धन का भुगतान ठेकेदार या फर्म को नहीं किया जा सकता, लेकिन यहां पंचायत नियमावली और शासनादेशों को ताक पर रखकर खुली लूट की गई।
जांच टीम पहुंची तो सचिव हुआ फरार
मामले की जांच के लिए गठित त्रिस्तरीय टीम में अनूप श्रीवास्तव (एडीओ को-ऑपरेटिव), शिवनाथ गुप्ता (अवर अभियंता, लघु सिंचाई) और फैज मसूद (सहायक विकास अधिकारी) को शामिल किया गया था। जांच टीम जब 27 तारीख को गांव पहुंची तो सचिव नदारद मिला, जिसके चलते टीम को बैरंग लौटना पड़ा। सोमवार को टीम दोबारा जांच के लिए पहुंची, लेकिन सचिव फिर नहीं आया और न ही उसने कोई अभिलेख उपलब्ध कराए। सहायक विकास अधिकारी फैज मसूद ने बताया कि सचिव द्वारा जांच से संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है और पूरा मामला अब उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है।