Kadipur Election 2027

Kadipur Election 2027: कादीपुर की सियासी धमक, पूरे सुल्तानपुर में दबदबा! एक क्षेत्र से 4 विधायक का नाता

साहित्य, कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत समेटे कादीपुर विधानसभा की पहचान अब जिले की राजनीति के प्रमुख केंद्र के रूप में भी है।

By : विकास जैन
Kadipur Election 2027: कादीपुर की सियासी धमक, पूरे सुल्तानपुर में दबदबा! एक क्षेत्र से 4 विधायक का नाता

Kadipur Election 2027: कादीपुर की सियासी धमक, पूरे सुल्तानपुर में दबदबा! एक क्षेत्र से 4 विधायक का नाता

श्याम चंद्र श्रीवास्तव, सुल्तानपुर: साहित्य, कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत समेटे कादीपुर विधानसभा की पहचान अब जिले की राजनीति के प्रमुख केंद्र के रूप में भी है। जिले की पांच में से चार विधानसभा क्षेत्रों के भाजपा विधायक इसी क्षेत्र से जुड़े हैं। जयसिंहपुर के राजप्रसाद उपाध्याय, लम्भुआ के सीताराम वर्मा, कादीपुर के राजेश गौतम, सुल्तानपुर के विधायक विनोद सिंह, यहां के निवासी हैं। यह स्थिति कादीपुर के राजनीतिक प्रभाव को रेखांकित करती है।

वर्ष 1952 में सामान्य सीट पर कांग्रेस के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी काशी प्रसाद पांडेय विधायक चुने गए। 1957 में सीट आरक्षित हुई तो शंकर लाल कंजर जीते। 1962 में सामान्य सीट पर श्रीपति मिश्र ने कांग्रेस को जीत दिलाई। 1967 में सीट फिर आरक्षित हो गई और आज तक आरक्षित है। इस चुनाव में कांग्रेस के सुखदेव ने जनसंघ के बलिहारी को हराया। बाद में सुखदेव ने कांग्रेस से बगावत कर चौधरी चरण सिंह का साथ पकड़ लिया। 1969 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के जगदीश प्रसाद एडवोकेट ने पार्टी का गढ़ बचाया।

 

1974 में जयराज गौतम जीते, लेकिन 1977 की कांग्रेस विरोधी लहर में लोकदल के बृजलाल ने उन्हें हरा दिया। 1980 में जयराज गौतम ने वापसी की। 1985 में कांग्रेस के रामआसरे और 1989 में फिर जयराज गौतम विजयी हुए। वर्ष 1991 की रामलहर में भाजपा के रामचंद्र चौधरी ने जीत दर्ज की। 1993 में बसपा के भगेलूराम, 1996 में भाजपा के काशीनाथ, फिर 2002 और 2007 में भगेलूराम विधायक बने। 2012 में सपा के रामचंद्र चौधरी ने जीत हासिल की। 2017 में भाजपा ने पूर्व मंत्री जयराज गौतम के बेटे राजेश गौतम को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने जीत दर्ज कर भाजपा की वापसी कराई। 

 

2022 में बसपा छोड़कर सपा में आए भगेलूराम के सामने भाजपा ने राजेश गौतम को दोबारा उतारा। राजेश गौतम फिर विधायक चुने गए। उनके कार्यकाल में पॉलीटेक्निक कॉलेज, नवोदय विद्यालय, कादीपुर बस स्टेशन का नवीनीकरण, अग्निशमन केंद्र, बाबा सत्यनाथ मठ में निर्माण, नदियों पर पुल, किसान सेवा केंद्र भवन और विद्युतीकरण जैसे कार्य हुए। हालांकि, बदहाल सड़कें और स्थानीय विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतें अब भी जनसमस्याओं में शामिल हैं। कादीपुर का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां कांग्रेस के लंबे प्रभाव से लेकर बसपा और सपा के उभार तथा भाजपा की वापसी तक, मतदाताओं ने समय-समय पर सत्ता का समीकरण बदला है। यहां की राजनीति का असर जिले के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों पर भी पड़ता है, इसलिए आने वाले चुनाव में यह क्षेत्र फिर सियासी चर्चा के केंद्र में रह सकता है।