Chitrakoot Flood: सतना जिले में लगातार 14 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने धार्मिक नगरी चित्रकूट की तस्वीर पूरी तरह बदलकर रख दी। मंदाकिनी नदी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि उफान मारता पानी घाटों को लांघकर बस्तियों, बाजारों, मंदिरों और दो मंजिला मकानों तक जा पहुंचा। आई प्रचंड बाढ़ में करीब 42 साल पुराना, 25 फीट ऊंचा और 300 मीटर चौड़ा नदी का बड़ा पुल ताश के पत्तों की तरह बह गया। कहीं सड़कों पर मोटरबोट और नावें तैरती दिखीं, तो कहीं लोग अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी को पानी में समाते देख छतों पर बैठकर मदद की गुहार लगाते नजर आए।
घाटों से लेकर आश्रमों तक तबाही
बाढ़ का सबसे विकराल रूप रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका चौराहा, क्योतरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड में देखने को मिला। इसके अलावा सती अनसूया, गुप्तगोदावरी और स्फटिक शिला जैसे प्रमुख तीर्थस्थल भी जलमग्न हो गए। मंदाकिनी तट की लगभग 400 दुकानें पूरी तरह पानी में डूब गईं। स्थानीय निवासी रोते हुए अपना दर्द बयां किया कि उनकी दोनों दुकानों का लाखों का सामान पानी में बर्बाद हो गया और अब इसकी भरपाई कैसे होगी?
सेना के 2 हेलीकॉप्टर और SDRF का रेस्क्यू
हालात की गंभीरता को देखते हुए सेना और आपदा राहत बलों ने कमान संभाली। सेना के 2 हेलीकॉप्टरों ने छतों और होटलों के ऊपरी तलों पर फंसे परिवारों को एयरलिफ्ट किया, जबकि SDRF की टीमों ने मोटरबोट के जरिए देर रात तक चलाए गए सघन अभियान में करीब 650 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया।
20 घंटे रहा ब्लैकआउट
सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था बंद कर दी गई, जिससे पूरा इलाका लगभग 20 घंटे तक अंधेरे में डूबा रहा। सतना-चित्रकूट मार्ग अवरुद्ध होने के कारण जिला मुख्यालय से निकले जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह और अपर कलेक्टर विकास सिंह को कालिंजर के लंबे रास्ते से होकर चित्रकूट पहुंचना पड़ा।
पुनर्वास बनी बड़ी चुनौती
देर शाम पानी उतरने के बाद तबाही का असली चेहरा सामने आया। जिन घरों में कुछ घंटे पहले चूल्हा जल रहा था, वहां राशन, कपड़े, फर्नीचर सब बर्बाद हो चुके थे। मंदाकिनी शांत हो जाएगी और घाटों पर फिर आरती की गूंज सुनाई देगी, लेकिन बेघर हुए हजारों परिवारों की उजड़ी गृहस्थी और दिल में बैठा खौफ शांत होने में लंबा वक्त लगेगा।
सीएम मोहन यादव ने संभाला मोर्चा
भीषण बाढ़ के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद राहत एवं बचाव कार्यों का मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री शनिवार देर रात दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे। रीवा पहुंचते ही उन्होंने देर रात ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रशासनिक अधिकारियों की आपात बैठक ली और पूरे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया।
सुबह पहुंचे चित्रकूट, किया संवाद
अगले दिन यानी रविवार की सुबह होते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीधे चित्रकूट पहुंचे और बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इसके बाद वे चित्रकूट विकास प्राधिकरण द्वारा बनाए गए राहत व आश्रय स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने बाढ़ से बेघर और नागरिकों से सीधे बातचीत की और उनका हाल-चाल जाना। सीएम मोहन ने प्रभावित परिवारों को भोजन, राशन व जरूरी सामान की राहत किट वितरित करते हुए हर संभव शासकीय सहायता देने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है और प्रभावितों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।