हिमांशु सिंह, लहरपुर-सीतापुर: लहरपुर तहसील के तंबौर क्षेत्र में शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बसंतापुर में सिंचाई विभाग ने करीब छह करोड़ रुपये की लागत से 600 मीटर लंबा तटबंध बनवाया था। पहली बड़ी बाढ़ में ही इसका करीब 75 प्रतिशत हिस्सा तेज धारा में बह गया। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
तटबंध टूटने के बाद देवपालपुर, कोल्हुपुरवा, बसंतापुरवा, लखनीपुर, रतनगंज और रायमडोर समेत कई गांवों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। रतनगंज में नदी तेजी से जमीन काट रही है। रायमडोर में ग्रामीणों के अनुसार 50 बीघे से अधिक कृषि भूमि फसल समेत नदी में समा चुकी है।
ग्रामीण असलम और रामहेत ने तटबंध निर्माण में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नदी की धारा को रोकने के इंतजाम कारगर साबित नहीं हुए। लखनीपुर में कटान रोकने के लिए लगाए गए जियो ट्यूब भी तेज बहाव में धंस गए। ग्रामीणों ने मामले की जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का पानी तंबौर कस्बे तक पहुंच सकता है। प्रशासन के मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार शारदा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर घटकर स्थिर हुआ है, फिर भी यह खतरे के निशान से छह सेंटीमीटर ऊपर है। घाघरा का जलस्तर भी 10 सेंटीमीटर घटा है और खतरे के निशान से 1.03 मीटर नीचे है। ग्रामीणों ने कटान प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है।