डीके मिश्रा, रायबरेली: राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए बछरावां के गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज के अंग्रेजी प्रवक्ता गिरजेश कुमार मल्ल के चयन पर गंभीर सवाल उठे हैं। महोबा के डीएवी इंटर कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. अखिलेश कुमार की ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आवेदन के साथ प्रस्तुत कुछ प्रमाण पत्रों पर तत्कालीन प्रधानाचार्य के फर्जी हस्ताक्षर हैं। साथ ही, संबंधित शिक्षक के अंग्रेजी विषय के पांच वर्ष के परीक्षाफल में 90 प्रतिशत की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं होने का भी दावा किया गया है। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।
शासन की राज्य शिक्षक पुरस्कार योजना के तहत शिक्षक के संबंधित विषय में पिछले पांच वर्षों का परीक्षाफल लगातार 90 प्रतिशत या उससे अधिक होना जरूरी है। शिकायत में वर्ष 2023 के अंग्रेजी विषय का रिजल्ट 73.10 प्रतिशत और वर्ष 2024 का रिजल्ट 71.81 प्रतिशत होने का ब्यौरा दिया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन आंकड़ों के बावजूद संबंधित शिक्षक की फाइल में 90 प्रतिशत रिजल्ट की पुष्टि की गई और निर्धारित मानकों का समुचित सत्यापन किए बिना फाइल आगे बढ़ा दी गई।
तत्कालीन प्रधानाचार्य ने हस्ताक्षर से किया इनकार
शिकायत का दूसरा अहम बिंदु आवेदन के साथ लगाए गए प्रमाण पत्रों पर तत्कालीन प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई प्रमाण पत्रों पर तत्कालीन प्रधानाचार्य अरुण कुमार श्रीवास्तव के हस्ताक्षर नहीं हैं। शिकायत में कहा गया है कि तत्कालीन प्रधानाचार्य ने 30 मार्च को कार्यालय ज्ञाप जारी कर इन प्रमाण पत्रों पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार किया था। साथ ही, उनका कहना था कि इन प्रमाण पत्रों की जानकारी भी उन्हें नहीं दी गई।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि प्रमाण पत्रों पर तत्कालीन प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर नहीं थे और संबंधित परीक्षाफल भी निर्धारित 90 प्रतिशत के मानक से कम था तो इनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ। शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि बिना प्रधानाचार्य के सत्यापन और रिजल्ट की जांच के फाइल जिला स्तर से निदेशालय तक कैसे पहुंची और 10 फरवरी 2026 को जारी चयन सूची में संबंधित शिक्षक का नाम कैसे शामिल हो गया।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल
मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फाइल का आवश्यक क्रॉस वेरिफिकेशन किए बिना संस्तुति कर उसे जिला स्तरीय समिति के समक्ष रखा गया और वहां से लखनऊ भेज दिया गया। शिकायत सामने आने के बाद अब विभाग ने मामले की जांच शुरू कराई है।
शिकायतकर्ता डॉ. अखिलेश कुमार ने शिक्षा निदेशक, संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिलाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और नियंत्रक को शिकायती पत्र भेजकर चयन प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गिरजेश कुमार मल्ल ने आवेदन के साथ तत्कालीन प्रधानाचार्य अरुण कुमार श्रीवास्तव के फर्जी हस्ताक्षर वाले प्रमाण पत्र लगाए हैं और उनके विषय अंग्रेजी का पांच वर्ष का 90 प्रतिशत रिजल्ट नहीं है। शिकायतकर्ता ने ऐसे दस्तावेजों को अमान्य मानते हुए चयन निरस्त करने की मांग की है।
शासनादेश में स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन की व्यवस्था
राज्य शिक्षक पुरस्कार के शासनादेश में चयन प्रक्रिया के तहत स्थलीय निरीक्षण का भी प्रावधान है। शिकायत में शासनादेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्थलीय निरीक्षण जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा किया जाना चाहिए। परीक्षाफल भी तत्कालीन प्रधानाचार्य और प्राधिकृत नियंत्रक की देखरेख में विद्यालय कार्यालय में तैयार कराया जाना था। इसके बाद ही प्रकरण जनपदीय चयन समिति के समक्ष जाना चाहिए था।
शासनादेश में सचिव, प्राधिकृत नियंत्रक और प्रधानाचार्य के दायित्व भी निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद जिला स्तरीय चयन समिति की भूमिका आती है, जिसमें जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), जिला विद्यालय निरीक्षक और राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शामिल होते हैं। ऐसे में अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों, परीक्षाफल और स्थलीय निरीक्षण का सत्यापन किस स्तर पर और किस प्रकार किया गया।
तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक संजीव कुमार सिंह ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी को संबंधित शिक्षक के पिछले पांच वर्षों के बोर्ड रिजल्ट, सेवा अभिलेख और आवेदन के साथ प्रस्तुत सभी प्रमाण पत्रों की मूल अभिलेखों से जांच और मिलान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि इस मामले में जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा कुछ भी हुआ है तो इसे गंभीरता से देखा जाएगा।
पुरस्कार मिलने से पहले गहराया विवाद
राज्य शिक्षक पुरस्कार की प्रक्रिया में बछरावां के गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज के अंग्रेजी प्रवक्ता गिरजेश कुमार मल्ल के चयन को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पुरस्कार मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। फिलहाल फर्जी हस्ताक्षर और रिजल्ट से जुड़े आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय जांच में दस्तावेजों और परीक्षाफल का मूल अभिलेखों से मिलान होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो चयन निरस्त करने के साथ संबंधित शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और एफआईआर की कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
क्या कहते है अधिकारी?
रायबरेली जिला विद्यालय निरीक्षक संजीव कुमार सिंह का कहना है कि प्रथम दृष्टया शिकायत को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी से निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सभी तथ्यों का खुलासा हो सकेगा।