संतोष यादव, सुलतानपुर: असफलता जब लक्ष्य से भटकाने के बजाय अपनी कमियों को पहचानने का अवसर बन जाए, तो सफलता की राह निकलने लगती है। धनपतगंज ब्लॉक के इटवा मलनापुर गांव के आयुष यादव की कहानी इसी जिद, धैर्य और मेहनत की मिसाल है। अग्निवीर की परीक्षा लगातार तीन साल पास करने के बाद भी शारीरिक दक्षता परीक्षा में पिछड़ने वाले आयुष ने अपनी कमजोरी पहचानी और तैयारी की पूरी रणनीति बदली। भोर में तीन बजे उठकर दौड़ने का सिलसिला शुरू किया।
इसका नतीजा रहा कि उनका चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में हो गया। होमगार्ड भर्ती में भी उनका चयन हुआ है। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले आयुष के लिए यह उपलब्धि एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि कई वर्षों के संघर्ष और निरंतर अभ्यास की कहानी है। उनके बाबा रघुनाथ यादव गांव के प्रधान रह चुके हैं। आयुष दो भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर पर हैं। उनकी शुरुआती से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा गांव के निकट सरैया मझौवा स्थित केवलापति स्मारक जूनियर हाईस्कूल और राम नरेश स्मारक इंटर कॉलेज में हुई।
लिखित परीक्षा में कामयाबी, फिजिकल में बार-बार मिली चुनौती
आयुष ने वर्ष 2023, 2024 और 2025 में लगातार अग्निवीर की परीक्षा पास की, लेकिन शारीरिक दक्षता परीक्षा में दौड़ के दौरान सफल नहीं हो सके। वर्ष 2025 में बिहार पुलिस की परीक्षा भी पास की, मगर शारीरिक परीक्षा में चूक गए। बार-बार एक ही चरण में मिली असफलता ने उन्हें अपनी तैयारी पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समझा कि लिखित परीक्षा में सफलता के साथ शारीरिक दक्षता पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। इसके बाद आयुष ने अपनी दिनचर्या बदली और दौड़ को तैयारी का प्रमुख हिस्सा बना लिया। जनवरी 2026 से वह भोर में करीब तीन बजे उठकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर नियमित दौड़ लगाने लगे। यह अभ्यास आज भी जारी है। दौड़ के लिए घर से सर्विस लेन तक जाना और फिर लौटकर लाइब्रेरी में पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। इस पूरे क्रम में वह प्रतिदिन करीब 40 किलोमीटर साइकिल भी चलाते हैं।
एक लक्ष्य के साथ कई परीक्षाओं की तैयारी
आयुष की तैयारी केवल यूपी पुलिस तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2026 में उन्होंने दिल्ली पुलिस की लिखित और शारीरिक परीक्षा पास की है, जिसका परिणाम अभी आना बाकी है। लेखपाल भर्ती की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में भी सफल हुए हैं, जबकि अंतिम परिणाम प्रतीक्षित है। एसएससी जीडी की लिखित परीक्षा भी पास कर चुके हैं। लोअर पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता के बाद मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर भी आया, लेकिन उसी तारीख को दिल्ली पुलिस की शारीरिक परीक्षा होने के कारण वह लोअर पीसीएस की मुख्य परीक्षा नहीं दे सके।
लगातार अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बीच आयुष ने यूपी पुलिस की शारीरिक दक्षता पर विशेष ध्यान दिया। उनका अनुभव बताता है कि बार-बार असफल होने के बाद केवल प्रयास दोहराना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कमी पहचानकर तैयारी का तरीका बदलना भी जरूरी है।
स्कूल में सम्मान, दूसरे विद्यार्थियों को मिली प्रेरणा
आयुष की सफलता पर उनके विद्यालय में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। स्कूल प्रबंधक मंजू सिंह और अध्यक्ष संजय सिंह ने उन्हें सम्मानित किया। उनकी उपलब्धि से विद्यालय के दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरणा मिल रही है।