सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर के बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड में आखिरकार फैसला आ गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गुरुवार को मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। सुरक्षा और जेल प्रशासन के इंतजामों के देखते हुए सजा का ऐलान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। अंबिकापुर जेल में मौजूद कुलदीप फांसी की सजा सुनते ही घबरा गया और उसके चेहरे पर तनाव साफ दिखा।
तीन के फांसी तो एक को उम्रकैद
कुलदीप के अलावा रिंकू उर्फ फूल सिंह और चंद्रकांत चौधरी को भी फांसी की सजा मिली है। चौथे दोषी आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा को अदालत ने मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा दी। कोर्ट ने 29 सितंबर को ही चारों को दोषी करार दिया था। उसी दिन पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने की कोशिश के एक दूसरे मामले में कुलदीप को 10 साल की सजा भी हुई थी। तब वह अदालत से बाहर निकलते वक्त मुस्कुराता दिखा था और उसका वीडियो भी सामने आया था।
रायपुर जेल भेजने की तैयारी
सजा के बाद कुलदीप को अंबिकापुर केंद्रीय जेल से रायपुर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रायपुर जेल में फांसी की व्यवस्था है। इसलिए आगे की जेल प्रक्रिया के तहत उसे वहां शिफ्ट किया जाएगा। फिलहाल वह अंबिकापुर जेल में बाकी सह-आरोपियों के साथ बंद है। जेल प्रशासन सुरक्षा और आने वाली कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहा है।
दो साल पहले हुई थी वारदात
यह चर्चित हत्याकांड का मामला 13 अक्टूबर 2024 का है। सूरजपुर थाने में तैनात एक प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 साल की बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में दुष्कर्म की भी पुष्टि हुई थी। करीब दो साल तक फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई चली और अदालत ने सभी सबूतों को परखने के बाद यह फैसला सुनाया।
फैसले के बाद भावुक हुआ परिवार
फैसला आते ही पीड़ित परिवार को राहत मिली। प्रधान आरक्षक ने भावुक होकर कहा कि अब उनकी पत्नी और बेटी की आत्मा को शांति मिली होगी। परिजनों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई। प्रधान आरक्षक के भाई ने बताया कि घटना के बाद उनके छोटे भाई पूरी तरह टूट गए थे। उन्हें पूरे परिवार ने मिलकर संभाला। उन्होंने पुलिस विभाग, साथी कर्मचारियों और मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का आभार जताया। परिवार का कहना है कि दोषी पक्ष उच्च अदालत गया तो वे भी मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे और आखिर तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।