उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित हनुमान मंदिर को हटाने पहुंची नगर निगम की टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। टीम के सामने शुक्रवार को ऐसी स्थिति बन गई जिसकी उम्मीद शायद अधिकारियों ने नहीं की थी। करीब 170 साल पुराने मंदिर के कुछ हिस्से तो हटा लिए गए। लेकिन मुख्य हनुमान प्रतिमा को निकालने की कोशिश सफल नहीं हुई।
मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि पुरातत्व विभाग ने प्रतिमा को हिलाने पर उसके क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई है। इसके बाद मंदिर की मूर्ति को हटाने की कार्रवाई रोकनी पड़ी। मौके पर श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों की भीड़ जुट गई और विरोध शुरू हो गया।
प्रतिमा हटाने में क्यों आई अड़चन?
खड़े हनुमान मंदिर के हिस्से हटाने के बाद जब मुख्य प्रतिमा को निकालने की बारी आई तो पुरातत्व विभाग की टीम ने हस्तक्षेप किया। शुरुआती जांच में विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि करीब 170 साल पुरानी प्रतिमा को अपनी जगह से हटाने पर उसमें दरार आ सकती है या वह खंडित हो सकती है। यही वजह है कि प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रतिमा की सुरक्षा है। मंदिर के पुजारी महेश पंडित ने भी चेतावनी दी है कि प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान हुआ तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
उज्जैन के 170 वर्ष पुराने खड़े हनुमान मंदिर से जुड़ी यह घटना आस्था से भरी है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर हटाने की प्रक्रिया के दौरान सती गेट पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा तीन दिनों के प्रयास के बावजूद एक इंच भी नहीं हिली।
भक्त इसे हनुमान जी की इच्छा और दिव्य संकेत मान रहे हैं।… pic.twitter.com/FSrTT57wEM
मंदिर टूटते देख भावुक हुए श्रद्धालु
कार्रवाई की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग और हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता मौके पर पहुंचने लगे। मंदिर के कुछ हिस्से टूटते देखकर कई श्रद्धालु भावुक हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक पुराना धार्मिक ढांचा नहीं है। लंबे समय से यह स्थान क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। लोगों ने प्रशासन से प्रतिमा और धार्मिक स्थल की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करने की मांग की है।
अब प्रशासन के सामने क्या विकल्प?
मंदिर के बाहरी हिस्से पर कार्रवाई के बाद भी मुख्य प्रतिमा अपनी जगह पर बनी हुई है। पुरातत्व विशेषज्ञों की चेतावनी के बाद अब प्रशासन को आगे की कार्रवाई बेहद सावधानी से करनी होगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाने की कोई तकनीकी व्यवस्था तैयार होगी या मौजूदा स्थिति को देखते हुए कार्रवाई में बदलाव किया जाएगा। इस बीच मौके पर तनाव और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
उज्जैन में सिंहस्थ-2028 को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के कारण कई इलाकों में निर्माण हटाने की कार्रवाई चल रही है। ऐसे में खड़े हनुमान मंदिर का मामला अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक और पुरातात्विक चुनौती भी बन गया है।