जितेन्द्र प्रताप सिंह, लखनऊ: अपराध पर अंकुश और अपराधियों के छक्के छुड़ाने में यूपी पुलिस की भूमिका जहां सराहनीय रही, वहीं फेक एनकाउंटर को लेकर उसकी कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मुठभेड़ में अक्सर ही अपराधियों के पैरों में गोली लगने की कथित पुलसिया 'थ्योरी' अब गले नहीं उतर रही है। वर्ष 2025 में श्रावस्ती में हुई मुठभेड़ चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कथित सिंघम इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार दुबे की स्टोरी सुन उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ भी सन्न रह गई।
इंस्पेक्टर ने 15 मीटर दूरी से आरोपी पर 9 एमएम सर्विस पिस्टल से दो गोलियां चलाईं, जो पैरों में लगीं। रात में चांदनी थी और उन्होंने हथियार लोड होने की आवाज सुनकर गोली चलाई थी। सवाल यह उठ रहा है कि 9 एमएम की गोली से 0.5x.5 सेंटीमीटर का घाव कैसे हो सकता है। श्रावस्ती में हुए कथित मुठभेड़ में अब इंस्पेक्टर और पूरी टीम फंसती जा रही है। कथित मुठभेड़ की थ्योरी, एफआईआर, कार्रवाई, पुलिस के बयान, पुलिसकर्मियों को मिले इनाम, चार्जशीट, घायल अपराधियों के घाव समेत कई बिंदु सवालों के घेरे में हैं। इस पर गत दिनों हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस की जमकर फजीहत हुई है।
23 पुलिसकर्मी फिर भी भाग गया आरोपी
23 पुलिसकर्मी होने के बावजूद आरोपी को रोक नहीं पाया गया। उसके पास से तमंचा और दो कारतूस मिले। सवाल यह उठ रहा है कि 13 पुलिसकर्मी एक ही सरकारी वाहन में कैसे गए। बाद में तीन टीमों में बांटकर अलग-अलग रास्तों पर कैसे पहुंचे। एसएचओ अश्विनी दुबे के मुताबिक 15 मीटर की दूरी से आरोपी पर 9 एमएम सर्विस पिस्टल से दो गोलियां चलाईं, जो पैरों में लगीं। सीबीआई को एसएचओ की शूटिंग क्षमता जांचने का निर्देश दिया गया है कि क्या रात में 15 मीटर की दूरी से केवल हथियार लोड करने की आवाज सुनकर सटीक निशाना लग सकता है।
कथित कबूलनामे की विश्वसनीयता पर सवाल
पुलिस ने दावा किया कि घायल छोटकऊ ने सात वर्षीय बच्ची को ई-रिक्शे से ले जाकर दुष्कर्म करने की बात स्वीकार की थी। इससे पहले दर्ज केस में दुष्कर्म या बच्ची के खून निकलने जैसी कोई बात दर्ज नहीं थी। एफआईआर 61 मिनट में दर्ज हुई थी। ऐसे में कथित कबूलनामे पर सवाल उठना लाजमी है। 9 मई 2025 को दर्ज केस में बच्ची को शफीक और उसके दो साथियों द्वारा ई-रिक्शा से ले जाने की बात कही गई। बच्ची और शफीक को कुछ ही देर बाद पकड़ लिए गए। इसके बावजूद बाद की पुलिस कार्रवाई में छोटकऊ को आरोपी बनाया गया।
शिकायतकर्ता एसएचओ ने ही दाखिल की चार्जशीट
पुलिस की जांच की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मामले की जांच पहले सब-इंस्पेक्टर को दी गई। बाद में दूसरे थाने को भेजी गई पर चार्जशीट उसी एसएचओ ने दाखिल की, जो शिकायतकर्ता भी थे। सभी 23 पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया गया। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि कार्रवाई को पुलिस का अच्छा काम बताया गया, उसमें आरोपी से ऐसे अपराध का कथित इकबालिया बयान हासिल करना भी शामिल है, जिसमें वह पहले ही सुप्रीम कोर्ट से बरी हो चुका था।