Burhanpur Shubham Murder Case

Burhanpur Shubham Murder Case: शुभम हत्याकांड में बड़ा फैसला: अर्जुन-शांतिलाल को उम्रकैद, छह बरी

शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मैथा में नवंबर 2023 में हुए शुभम हत्याकांड में करीब पौने तीन साल बाद अदालत का फैसला आया है।

By : विकास जैन
Burhanpur Shubham Murder Case: शुभम हत्याकांड में बड़ा फैसला: अर्जुन-शांतिलाल को उम्रकैद, छह बरी

Burhanpur Shubham Murder Case: शुभम हत्याकांड में बड़ा फैसला: अर्जुन-शांतिलाल को उम्रकैद, छह बरी

Burhanpur Shubham Murder Case: शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मैथा में नवंबर 2023 में हुए शुभम हत्याकांड में करीब पौने तीन साल बाद अदालत का फैसला आया है। द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निलेश कुमार जिरेती की अदालत ने आरोपी अर्जुन और शांतिलाल को हत्या एवं मारपीट का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं मामले में आरोपी बनाए गए जगदीश, शिवकुमार, गोरेलाल, राजेश, राजू और सूरज को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। फैसला 31 जुलाई 2026 को सुनाया गया। 

अर्जुन-शांतिलाल को उम्रकैद

अदालत ने अर्जुन और शांतिलाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 में आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा धारा 323 में दोनों को तीन-तीन महीने का सश्रम कारावास और पांच-पांच सौ रुपए जुर्माना सुनाया गया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर धारा 302 में एक वर्ष और धारा 323 में एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। दोनों मूल सजाएं एक साथ चलेंगी। 

मोटरसाइकिल की लाइट पड़ने पर शुरू हुआ था विवाद

अभियोजन के अनुसार, 16 नवंबर 2023 की रात शुभम अपने साथियों विशाल और शरद के साथ खेत पर सिंचाई की मोटर चालू करने गया था। वापस लौटते समय ग्राम मैथा में शिवकुमार की दुकान के पास मोटरसाइकिल की हेडलाइट सड़क पर मौजूद कुछ लोगों पर पड़ी। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ और शुभम के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट की गई। बीच-बचाव करने पहुंचे विशाल को भी चोट आई। गंभीर रूप से घायल शुभम को जिला अस्पताल बुरहानपुर ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में शुभम का बायां फेफड़ा और तिल्ली फटने सहित गंभीर अंदरूनी चोटें सामने आई थीं। डॉक्टर ने इन चोटों के कारण कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट से मौत होना बताया।

घायल गवाह की पहचान बनी दोषसिद्धि का आधार

अदालत ने घायल प्रत्यक्षदर्शी विशाल की गवाही और पहचान कार्रवाई का विस्तृत परीक्षण किया। फैसले में कहा गया कि विशाल ने पहचान परेड और न्यायालय में शांतिलाल तथा अर्जुन की स्पष्ट पहचान मारपीट करने वालों के रूप में की। दोनों से उसकी पूर्व रंजिश या विवाद भी प्रमाणित नहीं हुआ। न्यायालय ने माना कि विशाल स्वयं घटना में घायल हुआ था और शुभम को अस्पताल ले जाने सहित प्रारंभिक कार्रवाई में मौजूद रहा। ऐसे में घटना के समय उसकी उपस्थिति स्वाभाविक थी। अदालत ने उसकी गवाही के विश्वसनीय हिस्से को स्वीकार करते हुए अर्जुन और शांतिलाल की मारपीट में भूमिका सिद्ध मानी। 

पहचान कार्रवाई में विरोधाभास, छह को मिला संदेह का लाभ

अन्य छह आरोपियों के संबंध में अदालत को गवाहों की पहचान और बयानों में कई विरोधाभास मिले। फैसले के अनुसार कुछ आरोपियों को पहचान कार्रवाई में गलत पहचाना गया था। एक गवाह ने यह भी स्वीकार किया कि जेल में पहचान परेड से पहले उसे आरोपियों को थाने में और उनके फोटो दिखाए गए थे, जिससे उसकी पहचान की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट में जगदीश और शिवकुमार को मारपीट रोकने और बीच-बचाव करने वाला बताया गया था, लेकिन बाद के बयान में उन्हें आरोपी बनाया गया। अदालत ने इस बदलाव को भी महत्वपूर्ण माना। गोरेलाल सहित अन्य आरोपियों की पहचान एवं घटना में सहभागिता संदेह से परे प्रमाणित नहीं होने के कारण उन्हें दोषमुक्त किया गया।

अवैध जमाव और गाली-गलौज के आरोप भी सिद्ध नहीं

अदालत ने कहा कि आठ आरोपियों में से केवल अर्जुन और शांतिलाल की भूमिका सिद्ध हुई। पांच या उससे अधिक लोगों की सहभागिता प्रमाणित नहीं होने से धारा 147 और 149 के तहत अवैध जमाव एवं साझा उद्देश्य का आरोप समाप्त हो गया। गाली-गलौज के मामले में गवाह ने कथित अश्लील शब्दों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया और न ही उससे किसी व्यक्ति को क्षोभ होने का तथ्य प्रमाणित हुआ। इसलिए दोनों दोषियों को भी धारा 294 के आरोप से बरी कर दिया गया।

चार की रिहाई के आदेश, दो के जमानत मुचलके समाप्त

फैसले के बाद अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में बंद बरी किए गए आरोपियों की रिहाई के आदेश जिला जेल खंडवा भेजने के निर्देश दिए। जमानत पर चल रहे राजेश और राजू के जमानत मुचलके भी समाप्त कर दिए गए। अर्जुन और शांतिलाल को सजा भुगताने के लिए जेल भेजने के आदेश जारी किए गए।

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