हिमांशु सिंह, सीतापुर: रामपुर मथुरा क्षेत्र में घाघरा नदी का तेज कटान ग्रामीणों के लिए लगातार मुसीबत बढ़ा रहा है। ग्राम पंचायत नागेशरपुरवा के शुकुलपुरवा गांव में कटान तेजी से बढ़ रहा है। इससे ग्रामीण अपने आशियाने उजाड़कर घर-गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने को मजबूर हैं। कई परिवार नावों के सहारे जरूरी सामान दूसरी ओर ले जा रहे हैं, जबकि कुछ लोग सिर पर गृहस्थी का सामान रखकर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक नदी का कटान लगातार तेज हो रहा है। हर साल बाढ़ और कटान के कारण उन्हें घर खाली करना पड़ता है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बार-बार घर और ठिकाना बदलने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
प्रशासन की ओर से राहत और बचाव के प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम प्रधान और राजस्व विभाग की टीम मौके पर निगरानी कर रही है। ग्रामीणों से खतरे को देखते हुए समय रहते जरूरी सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की अपील की जा रही है।
मुुआवजे से ज्यादा चिंता आशियाने की
ग्राम प्रधान के अनुसार, शासन की गाइडलाइन के तहत बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हुई कच्ची झोपड़ी के लिए ₹8,000 तथा कटान से क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए पक्के मकान के लिए ₹1.20 लाख की सहायता का प्रावधान है। हालांकि ग्रामीणों की चिंता सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाए गए आशियाने उजड़ने के बाद आर्थिक सहायता से दीवारें तो दोबारा खड़ी की जा सकती हैं, लेकिन घर से जुड़ी यादों और बीती जिंदगी को वापस लाना आसान नहीं होगा।