Karwa Chauth 2026: सुहाग के पर्व करवा चौथ के मौके पर गुरुवार 29 अक्टूबर को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। रात में चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाएगा। हालांकि, इस बार चक्रवाती असर और बादलों के कारण कुछ जिलों में चांद के दीदार के लिए महिलाओं को थोड़ा अधिक इंतजार करना पड़ सकता है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी छोर के बीच चंद्रोदय के समय में लगभग 40 मिनट का अंतर रहेगा।
एमपी में किस जिले में कब दिखेगा चांद?
नेशनल अवॉर्डी विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार, चंद्रमा की गति पूर्व से पश्चिम की ओर होने के कारण पूर्वी छोर पर स्थित जिलों में चांद सबसे पहले नजर आएगा, जबकि पश्चिमी सीमा पर बसे जिलों में सबसे अंत में दीदार होंगे। प्रदेश में सबसे पहले रात 8:01 बजे सिंगरौली में चांद निकलेगा। सबसे अंत में आलीराजपुर में और सबसे आखिरी में रात 8:41 बजे आलीराजपुर में चांद नजर आएगा। तो वही राजधानी भोपाल में रात 8:26 बजे और इंदौर में रात 8:34 बजे चांद का दीदार होगा।
मौसम का मिजाज, लंबा होगा इंतजार
खगोल विज्ञान के जानकारों के मुताबिक, इस बार करवा चौथ पर मौसम थोड़ी चुनौती बन सकता है। जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में तेज बारिश होने का अनुमान जताया गया है। वही भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है, जिससे चंद्र दर्शन में रुकावट आ सकती है।
सारिका घारू की सलाह
विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि यदि बादलों या कोहरे के कारण चांद साफ न दिखाई दे, तो महिलाएं निर्धारित समय के बाद पूर्व-उत्तर दिशा में चंद्रमा की उपस्थिति मानकर अर्घ्य दे सकती हैं। ऊंची इमारतों या पहाड़ियों के कारण वास्तविक दर्शन में 10 से 15 मिनट की देरी भी हो सकती है।
रस्म और व्रत की परंपराएं
आपको बता दें कि करवा चौथ के लंबे और कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले 'सरगी' खाकर की जाती है। यह सरगी आमतौर पर सास द्वारा अपनी बहू को दी जाती है, जिसमें फल, मेवे, मिठाई और फेनी जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि ये खाद्य पदार्थ दिनभर शरीर में ऊर्जा बनाए रखते हैं। महिलाएं इस दिन मां पार्वती, भगवान गणेश, चौथ माता और चंद्रदेव की विधि-विधान से पूजा करती हैं। कथा सुनने के बाद रात में छलनी से चांद को देखकर और पति को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न किया जाता है।