अनुराग गुप्ता, बहराइच: प्रदेश में डॉ रोहित मिश्रा के हाथ युवा मोर्चा की कमान आने के बाद अब बहराइच की बारी है। जिले में भाजयुमो के नए जिलाध्यक्ष को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। यहां ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य पिछड़ा वर्ग के दावेदारों ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी के बहराइच दौरे में दम-खम के साथ अपनी-अपनी दावेदारी प्रस्तुत की थी। तीनों दावेदार लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आते रहते हैं।
किस युवा चेहरे पर भरोसा?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और राजनीतिक रणनीति की पहली झलक भी मानी जा रही है। ऐसे में हर निगाह इस बात पर टिकी है कि पार्टी आखिर किस युवा चेहरे पर भरोसा जताती है।
कौन हैं मजबूत दावेदार?
पार्टी के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, अरुणेन्द्र सिंह 'अंकित', सौरभ मिश्रा और अखिलेश यादव 'गोले' फिलहाल सबसे मजबूत दावेदारों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। तीनों की अपनी-अपनी ताकत है, अपना संगठनात्मक आधार है और समर्थकों की अलग-अलग टोली भी। दिलचस्प यह है कि मुकाबला सिर्फ तीन चेहरों के बीच नहीं, बल्कि तीन सामाजिक समीकरणों के बीच भी माना जा रहा है। एक ओर क्षत्रिय चेहरा, दूसरी ओर ब्राह्मण प्रतिनिधित्व, तो तीसरी ओर ओबीसी समीकरण। ऐसे में संगठन के सामने चुनौती केवल जिलाध्यक्ष चुनने की नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी बिसात पर ऐसा मोहरा बैठाने की है, जो युवाओं के साथ-साथ सामाजिक संतुलन का संदेश भी दे सके।
भाजपा किस पर खेलेगी दांव?
भाजपा की चुनावी राजनीति में सामाजिक समीकरण हमेशा अहम रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदेश नेतृत्व इस नियुक्ति के जरिए जिले में संगठन को नई धार देने के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को भी मजबूती देने की कोशिश करेगा। यही वजह है कि संगठन के गलियारों में इन दिनों चर्चा सिर्फ इस बात की नहीं है कि जिलाध्यक्ष कौन बनेगा, बल्कि इस बात की भी है कि भाजपा 2027 के लिए किस सामाजिक वर्ग पर सबसे बड़ा दांव खेलने जा रही है।
क्या कहते है सियासी पंड़ित?
हालांकि अंतिम फैसला प्रदेश नेतृत्व के पाले में है। लेकिन इतना तय है कि यह ताजपोशी सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी पटकथा का पहला अध्याय साबित हो सकती है। सियासी पण्डितों की मानें तो युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष इस बार सिर्फ कार्यक्रमों का आयोजक नहीं होगा, बल्कि 2027 के चुनावी रण में युवाओं की फौज का सेनापति भी होगा। यही वजह है कि इस एक पद पर जिले के कई नेताओं की नजरें टिकी हैं और हर खेमा अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुटा है।